Haridra Ganesh Kavach: “हरिद्रा गणेश कवचम्” (Haridra Ganesh Kavach) भगवान श्री गणेश को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली मंत्र (तांत्रिक स्तोत्र) है। हरिद्रा गणेश, गणपति के उन 32 दिव्य स्वरूपों में से एक हैं, जिनका वर्ण पीला होता है और जो पीले वस्त्रों से शोभित रहते हैं। इस स्वरूप की पूजा विशेष रूप से सौभाग्य, संपत्ति, बाधा समाधान और रक्षा के लिए की जाती है। इस मंत्र को उषा मंगेशकर जी ने अपनी मधुर आवाज़ में प्रस्तुत किया है, जिसे सुनकर मन में भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
हरिद्रा गणेश कवचम् | Haridra Ganesh Kavach
हरिद्रा गणेश कवचम् – विधि (Haridra Ganesh Kavach – Method)
हरिद्रा गणेश कवचम् स्तोत्रम् का पाठ शुक्ल पक्ष के बुधवार से आरंभ करना अत्यंत शुभ माना गया है। पाठ करने वाले को शुद्ध आचरण और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
पाठ की विधि इस प्रकार है —
- स्तोत्र पाठ से पहले स्नान कर स्वच्छ और साफ़ कपड़े पहनें।
- पूजा के लिए हरिद्रा (पीले) गणेश जी की मूर्ति या उनका पीला-आभा युक्त चित्र स्थापित करें।
- भगवान गणेश को दूर्वा (दूब घास) अवश्य अर्पित करें, यह उनका प्रिय है।
- उन्हें फल और मिठाई का भोग लगाएं।
- मंत्र जाप के लिए पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें, यह दिशा शुभ फल देने वाली मानी जाती है।
- अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी शांत आसन में बैठकर मंत्र जाप करें।
- सर्वोत्तम फल के लिए कम से कम 6 माह तक नियमित रूप से इसका पाठ करना चाहिए।
- स्तोत्र पाठ के बाद भगवान गणेश की आरती अवश्य करें।
- आरती के पश्चात परिवार की सुख, शांति और समृद्धि हेतु गणेश जी से आशीर्वाद मांगे।
- अंत में भगवान को लगाया गया भोग परिवार में प्रसाद रूप में बाँट दें।
हरिद्रा गणेश कवचम् (Haridra Ganesh Kavach)
॥ अथ हरिद्रा गणेश कवच ॥
ईश्वरउवाच:
शृणु वक्ष्यामि कवचं सर्वसिद्धिकरं प्रिये ।
पठित्वा पाठयित्वा च मुच्यते सर्व संकटात् ॥१॥
अज्ञात्वा कवचं देवि गणेशस्य मनुं जपेत् ।
सिद्धिर्नजायते तस्य कल्पकोटिशतैरपि ॥ २॥
ॐ आमोदश्च शिरः पातु प्रमोदश्च शिखोपरि ।
सम्मोदो भ्रूयुगे पातु भ्रूमध्ये च गणाधिपः ॥ ३॥
गणाक्रीडो नेत्रयुगं नासायां गणनायकः ।
गणक्रीडान्वितः पातु वदने सर्वसिद्धये ॥ ४॥
जिह्वायां सुमुखः पातु ग्रीवायां दुर्मुखः सदा ।
विघ्नेशो हृदये पातु विघ्ननाथश्च वक्षसि ॥ ५॥
गणानां नायकः पातु बाहुयुग्मं सदा मम ।
विघ्नकर्ता च ह्युदरे विघ्नहर्ता च लिङ्गके ॥ ६॥
गजवक्त्रः कटीदेशे एकदन्तो नितम्बके ।
लम्बोदरः सदा पातु गुह्यदेशे ममारुणः ॥ ७॥
व्यालयज्ञोपवीती मां पातु पादयुगे सदा ।
जापकः सर्वदा पातु जानुजङ्घे गणाधिपः ॥ ८॥
हारिद्रः सर्वदा पातु सर्वाङ्गे गणनायकः ।
य इदं प्रपठेन्नित्यं गणेशस्य महेश्वरि ॥ ९॥
कवचं सर्वसिद्धाख्यं सर्वविघ्नविनाशनम् ।
सर्वसिद्धिकरं साक्षात्सर्वपापविमोचनम् ॥ १०॥
सर्वसम्पत्प्रदं साक्षात्सर्वदुःखविमोक्षणम् ।
सर्वापत्तिप्रशमनं सर्वशत्रुक्षयङ्करम् ॥ ११॥
ग्रहपीडा ज्वरा रोगा ये चान्ये गुह्यकादयः ।
पठनाद्धारणादेव नाशमायन्ति तत्क्षणात् ॥ १२॥
धनधान्यकरं देवि कवचं सुरपूजितम् ।
समं नास्ति महेशानि त्रैलोक्ये कवचस्य च ॥ १३॥
हारिद्रस्य महादेवि विघ्नराजस्य भूतले ।
किमन्यैरसदालापैर्यत्रायुर्व्ययतामियात् ॥ १४॥
॥ इति विश्वसारतन्त्रे हरिद्रागणेशकवचं सम्पूर्णम् ॥
इसे भी पढ़ें:
- गणपति अथर्वशीर्ष – मंत्र
- महामृत्युंजय मंत्र: स्तोत्र, जाप, विधि, अर्थ और महत्व
- श्री गणेश आरती पाठ – जय गणेश जय गणेश देवा आरती, अर्थ व महत्व
हरिद्रा गणेश कवचम् – लाभ (Haridra Ganesh Kavach – Benefits)

1. कर्ज से मुक्ति
सुबह के समय 6 माह तक नियमित पाठ करने से आर्थिक बाधाएँ दूर होती हैं और कर्ज से मुक्ति मिलने में सहायता मिलती है। मन में शांति आती है और समृद्धि के द्वार खुलते हैं।
2. संकटों का नाश
भक्ति भाव से पाठ करने पर जीवन की विभिन्न कठिनाइयाँ, बाधाएँ और संकट दूर होते हैं। गणेश जी की कृपा से समस्याएँ हल होने लगती हैं।
3. सुख–शांति की प्राप्ति
इस स्तोत्र के पाठ से घर-परिवार में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गणेश जी का आशीर्वाद जीवन को संतुलित और शांत बनाता है।
4. बुद्धि और विद्या की वृद्धि
गणेश जी बुद्धि और विद्या के दाता हैं। कवच का नियमित पाठ मन को स्थिर करता है, एकाग्रता बढ़ाता है और ज्ञान में वृद्धि करता है।
5. साधना में प्रगति
यह स्तोत्र आध्यात्मिक साधना में सहायक है। मन को निर्मल कर आत्मविकास, साधना और भक्ति-पथ पर आगे बढ़ने में मदद करता है।
6. शत्रुओं से रक्षा
नियमित पाठ से शत्रु और विरोधियों की नकारात्मकता समाप्त होती है। भगवान गणेश की दिव्य शक्ति हमें सुरक्षा प्रदान करती है।
7. धार्मिक उत्साह में वृद्धि
इस स्तोत्र का प्रभाव भक्त के भीतर भक्ति, श्रद्धा और धार्मिक उत्साह को बढ़ाता है, जिससे साधना और भी सशक्त बन जाती है।












