यह 1 व्रत बना देगा आपको धनवान – माँ वैभव लक्ष्मी व्रत कथा, विधि, उद्यापन और आरती | Maa Vaibhav Laxmi Vrat Katha

Maa Vaibhav Laxmi Vrat Katha, माँ वैभव लक्ष्मी व्रत कथा
Maa Vaibhav Laxmi Vrat Katha, माँ वैभव लक्ष्मी व्रत कथा

Maa Vaibhav Laxmi Vrat Katha: क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि मेहनत तो दिन-रात करते हैं, लेकिन महीने के आखिर में हाथ खाली रह जाते हैं? घर में पैसों को लेकर क्लेश हो या बरकत की कमी — अगर जवाब ‘हाँ’ है, तो यह वीडियो आपके लिए माँ वैभव लक्ष्मी का दिव्य संदेश हो सकता है।

माँ वैभव लक्ष्मी व्रत कथा, विधि, उद्यापन और आरती

Maa Vaibhav Laxmi Vrat Katha आज मैं बताने जा रही हूँ माँ वैभव लक्ष्मी व्रत के बारे में — एक ऐसा व्रत, जिसने लाखों लोगों की ज़िंदगी में सुख, शांति और समृद्धि लाई है। शुक्रवार को किया जाने वाला यह व्रत माँ लक्ष्मी के आठ स्वरूपों — अष्टलक्ष्मी — का आशीर्वाद दिलाता है। इससे धन, सेहत, संतान, ज्ञान, धैर्य, और हर काम में सफलता मिलती है।

कौन कर सकता है यह माँ वैभव लक्ष्मी व्रत (Maa Vaibhav Laxmi Vrat Katha) :

Maa Vaibhav Laxmi Vrat Katha: कोई भी — महिला, पुरुष, विवाहित या अविवाहित — जो आर्थिक तंगी, कर्ज़ या मानसिक अशांति से परेशान है। आमतौर पर 11 या 21 शुक्रवार का संकल्प लिया जाता है, और मनोकामना पूरी होने पर उद्यापन किया जाता है।

माँ वैभव लक्ष्मी व्रत कथा पूजा की तैयारी:

एक साफ और शांत जगह चुनें, लाल कपड़ा बिछाकर माँ वैभव लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। साथ रखें — तांबे का लोटा, लाल फूल, चावल, घी का दीपक, कपूर, कुमकुम, हल्दी, मिठाई (खीर या सफेद मिष्ठान) और कथा की किताब।

माँ वैभव लक्ष्मी व्रत पूजा विधि (संक्षेप में):

  • संकल्प लें — माँ से सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत का निश्चय करें।
  • स्थापना करें — चौकी पर माँ की तस्वीर और श्री यंत्र रखें, कलश और गहना/सिक्का पूजा में शामिल करें।
  • पूजन करें — दीप जलाएँ, फूल चढ़ाएँ, सिंदूर और कुमकुम लगाएँ।
  • कथा सुनें या पढ़ें — बिना कथा व्रत अधूरा रहता है।
  • मंत्र जाप करें — “ॐ महालक्ष्म्यै नमः” का 108 बार जाप करें।
  • आरती और भोग — कपूर से आरती करें और खीर का भोग लगाएँ।
  • अंत में माँ से अपनी मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना करें और सात्विक भोजन कर व्रत खोलें।

अगर यह जानकारी आपके काम की लगी, तो वीडियो को लाइक करें और माँ लक्ष्मी की कृपा फैलाने के लिए इसे दूसरों तक ज़रूर पहुँचाएँ।

Maa Vaibhav Laxmi Vrat Katha | माँ वैभव लक्ष्मी व्रत कथा

Maa Vaibhav Laxmi Vrat Katha: अब मैं आपको वो चमत्कारी कथा सुनाती हूँ, जो इस व्रत की आत्मा है। इसे पूरे ध्यान और भक्ति से सुनिएगा।

Maa Vaibhav Laxmi Vrat Katha: बहुत समय पहले की बात है, एक शहर में शीला नाम की एक औरत अपने पति के साथ रहती थी। शीला बहुत ही धार्मिक और संतोषी स्वभाव की थी, और उसका पति भी एक नेक इंसान था। उनके दिन बड़ी हंसी-ख़ुशी से गुज़र रहे थे। लोग उनकी जोड़ी की मिसालें दिया करते थे। लेकिन कहते हैं न, वक़्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता। शीला के पति को बुरी संगत लग गई। उसे जुआ खेलने और शराब पीने की आदत पड़ गई।

देखते ही देखते, उनकी सारी धन-दौलत खत्म हो गई। घर में गरीबी छा गई। जो लोग कल तक उनकी तारीफ करते थे, आज वही उनसे मुँह फेरने लगे। शीला दिन-रात दुखी रहती, लेकिन वो माँ लक्ष्मी की बहुत बड़ी भक्त थी। वह हर पल माँ से यही प्रार्थना करती कि उसके पति को सही रास्ता दिखाएं और घर के दुख-दर्द दूर करें।

एक दिन दोपहर में, उनके दरवाज़े पर किसी ने दस्तक दी। शीला ने दरवाज़ा खोला तो देखा एक बुज़ुर्ग अम्मा खड़ी थीं। उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। शीला ने उन्हें बड़े आदर से अंदर बिठाया और पानी पिलाया। अम्मा ने शीला से उसकी उदासी का कारण पूछा। इतना सुनते ही शीला की आँखों से आँसू बहने लगे और उसने अपना सारा दुख कह सुनाया।

सारी बात सुनकर वो अम्मा बोलीं, “बेटी, चिंता मत कर। तू माँ वैभव लक्ष्मी का व्रत कर। यह व्रत बहुत शक्तिशाली है। इसे करने से हर मुराद पूरी होती है और घर में धन, सुख और शांति लौट आती है।”

उस अम्मा के रूप में स्वयं माँ लक्ष्मी ही आई थीं। उन्होंने शीला को वैभव लक्ष्मी व्रत की पूरी विधि समझाई। उन्होंने कहा, “बेटी, हर शुक्रवार को पूरे विधि-विधान से यह व्रत करना। श्रद्धा से पूजा करके कथा सुनना और उस दिन खीर का प्रसाद बनाकर पहले माँ को भोग लगाना, फिर खुद खाना। 11 या 21 शुक्रवार का संकल्प लेना। माँ तेरी पुकार ज़रूर सुनेंगी।”

शीला ने उसी दिन मन में ठान लिया और अगले ही शुक्रवार से पूरे विश्वास के साथ वैभव लक्ष्मी का व्रत रखना शुरू कर दिया। वह सुबह उठकर नहाती, पूरे घर को साफ़ करती, और फिर बताई गई विधि से माँ वैभव लक्ष्मी की पूजा करती। वह बड़े भक्ति भाव से कथा सुनती और माँ से अपने पति के लिए प्रार्थना करती।

जैसे-जैसे शुक्रवार बीतते गए, एक चमत्कार होने लगा। शीला के पति के बर्ताव में सुधार आने लगा। उसकी शराब और जुए की आदत धीरे-धीरे छूट गई। वह फिर से मेहनत से काम करने लगा। कुछ ही समय में उनके घर की आर्थिक हालत सुधरने लगी। घर में फिर से सुख, शांति और खुशहाली लौट आई।

जब शीला का 21 शुक्रवार का संकल्प पूरा हुआ, तो उसने विधि-विधान से व्रत का उद्यापन किया। उसने 7 सुहागिन स्त्रियों को घर बुलाकर उन्हें वैभव लक्ष्मी व्रत कथा की किताब और कुमकुम का तिलक लगाकर भेंट दी और सभी को खीर का प्रसाद खिलाया। उस दिन शीला और उसके पति ने माँ लक्ष्मी का धन्यवाद किया। माँ वैभव लक्ष्मी की कृपा से उनका जीवन एक बार फिर खुशियों से भर गया था।

बोलिए माँ वैभव लक्ष्मी की जय! यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से किया गया कोई भी काम कभी बेकार नहीं जाता।

कहानी की तरह ही, व्रत के नियमों को मानना भी बहुत ज़रूरी है, तभी आपको इसका पूरा फल मिलता है।

माँ वैभव लक्ष्मी व्रत उद्यापन की विधि:

Maa Vaibhav Laxmi Vrat Katha: जब आपके संकल्प के 11 या 21 शुक्रवार पूरे हो जाएं, तो आखिरी शुक्रवार को व्रत का उद्यापन करना ज़रूरी है। उस दिन भी वैसे ही पूजा करें जैसे आप करते आए हैं। पूजा के बाद, कम से कम 7 कुंवारी लड़कियों या सुहागिन महिलाओं को अपने घर बुलाएं। उन्हें आदर के साथ बिठाकर कुमकुम का तिलक लगाएं और प्रसाद में खीर खिलाएं। इसके बाद, माँ वैभव लक्ष्मी के आशीर्वाद के तौर पर उन्हें वैभव लक्ष्मी व्रत कथा की एक-एक किताब तोहफे में दें। आखिर में माँ लक्ष्मी को प्रणाम करके अपनी मुराद पूरी करने के लिए उनका धन्यवाद करें और भविष्य में भी अपनी कृपा बनाए रखने के लिए प्रार्थना करें।

Maa Vaibhav Laxmi Vrat Katha: तो यह थी माँ वैभव लक्ष्मी व्रत की पूरी विधि, कथा और नियम। यह व्रत सिर्फ धन ही नहीं, बल्कि मन की शांति, परिवार में प्यार और जीवन में तरक्की भी देता है। याद रखिएगा, सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास ही इस व्रत का आधार है। अगर आप पूरे मन से माँ को पुकारेंगे, तो वह आपकी झोली खुशियों से ज़रूर भर देंगी।

मैं माँ वैभव लक्ष्मी से प्रार्थना करती हूँ कि जो भी भक्त इस वीडियो को देख रहा है, उसके जीवन से सारे आर्थिक संकट दूर हों, उनके घर में सुख-शांति आए और उनकी हर अच्छी मनोकामना पूरी हो।

Maa Vaibhav Laxmi Vrat Katha: अगर आपके मन में कोई भी सवाल है, तो नीचे कमेंट्स में ज़रूर पूछें। और माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने के लिए, कमेंट्स में “जय माँ वैभव लक्ष्मी” अवश्य लिखें, ताकि माँ की कृपा आप पर और आपके परिवार पर हमेशा बनी रहे।

माँ वैभव लक्ष्मी आरती यहाँ पढ़ें: लक्ष्मी जी की आरती लिरिक्स – ॐ जय लक्ष्मी माता

धन्यवाद। जय माँ लक्ष्मी।

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पवन शास्त्री, साहित्याचार्य (M.A.) - Author

भारतीय धर्म, पुराण, ज्योतिष और आध्यात्मिक ज्ञान के शोधकर्ता। Sursarita.in (धर्म कथा गंगा) पर वे सरल भाषा में धार्मिक कथाएँ, राशिफल, पञ्चांग और व्रत विधियाँ साझा करते हैं।

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Pawan Shastri

Pawan Shastri is an experienced music teacher and spiritual knowledge expert with 10 years of experience in harmonium, keyboard, singing, and classical music.

He holds an M.A. degree and is also a certified Jyotish Shastri (Astrology Expert). His articles and content aim to share devotional, musical, and spiritual knowledge in a simple, accurate, and emotionally engaging manner.

Pawan Shastri believes that the fusion of devotion in melody and wisdom in knowledge can bring peace, energy, and positivity to everyone’s life.

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