
Matangi Chalisa in Hindi: मातंगी चालीसा का संपूर्ण पाठ, महत्व, लाभ और करने की विधि यहाँ पढ़ें। माँ मातंगी की कृपा से वाणी का तेज, बुद्धि, मान-सम्मान और जीवन में समृद्धि मिलती है।
Matangi Chalisa in Hindi: मातंगी चालीसा संपूर्ण पाठ, महत्व, लाभ और सही विधि
Matangi Chalisa in Hindi: मातंगी चालीसा माँ मातंगी को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है, जो दस महाविद्याओं में नवम स्वरूप के रूप में पूजित हैं। माँ मातंगी वाणी, कला, संगीत, ज्ञान और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं।
चालीसा के नियमित पाठ से अभिव्यक्ति में शक्ति, वाणी में मधुरता और मन में स्थिरता प्राप्त होती है। जो साधक ज्ञान, शिक्षा, विद्या और वाणी-सिद्धि की इच्छा रखते हैं, उनके लिए यह चालीसा अत्यंत फलदायी माना जाता है।
Matangi Chalisa in Hindi: मातंगी चालीसा पाठ
मातंगी चालीसा दोहा
वंदु विनायक विध्रहर,
शारद करो सहाय,
आनंदनी ए याचना मोढेश्वरी गुण गवाय.
प्रणमुं पाय मातंगी मात,
मोढेश्वरी नाम तुज ख्याता
मातंगी वास वाव मही कीधो,
आश्रय सर्व मोढोने दीधो,
सोल श्रृंगार सिंहारूढ शोभे,
भुज अढार दर्शन मन लोभे
वंदन चरणामृत सुखदाई,
आतमना पड शत्रु हणाये
भरतखंड शुभ पश््विम भागे,
धरमारण्य क्षेत्र तप काजे,
साधक रक्षक भट्टारीका कहावे,
तपस्वी तप तपवा अही आवे
देव देवी जपतप अहीं जापे,
मा भट्टारीका तप रक्षण आपे
तीरथ सरस्वती सुखदाई,
पितृ शांति अहीं पींडथी थाये
मोक्ष धाम देहुती माता,
आश्रम कपिल शास्त्र विख्याता
मोढेरा शुभ स्थान प्रतापी,
मोढेश्वरी चतुर युग व्यापी
सूर्य मंदिर बकुंलार्क अजोडा,
विश्वकर्माकृत रविकुंड चौडा
धरमारण्य धरा अति पावन,
श्री रामयज्ञे मातंगी सुहावन
महासुद तेरस सुखदाता,
प्रगट्यां मातंगीयज्ञे माता
जयजयकार जगत मही थाये,
सुमन वरसे देवो जय गाये
सूर्यकुंड सुभग फलदाता,
झीले जल मातंगी माता
श्री रामसीता यज्ञ आराधे,
सत्यपुरे मातंगी साधे
लक्ष्मीरूप मातंगी माता,
पूजन नैवेद सर्व सुखदाता
वडा, लाडु, दुधपाक सुहावे,
नैवेद धरे सीता प्रिय भावे
समस्त मोढ तणी कुलमाता,
अष्ठसिध्धि नवनिधि फलदाता
महासुद तेरस थाल धराये,
मोढ चडती दिन प्रतिदिन थाये
अष्टादश भुज आशिष आपे,
स्थान नीज सत्यपुरे स्थापे
सतयुगे सतपुरी कहावे,
त्रेतानाम महेरकपुर भावे
द्वापर युग मोहकपुर सोहे,
मोढेरा कलयुग मन माहे
धर्मराज शिव तप आराधे,
सहस्त्र यर्षे शिव दर्शन साधे
प्रगट्यां शिव शुभ आशिष आपे,
स्थान नीज धर्मेश्वर स्थापे
वदे महेश्वर कृपा निधाना,
ए विशावनाथ काशी समस्थाना
मात रांदल अश्वनी रूप लीधा,
ध्वादश वर्ष कठीन तपकीधां
सूर्यराणी रांदल सुखदायी,
उपनामे संज्ञा कहेवाये
तप प्रभाव संज्ञा सुखदाई,
पति सूर्यदेवमुख दर्शन थाये
संज्ञाए ज्यां तप आराध्या,
सूर्य मंदिर रामे त्यां बांध्या
प्रति सुद तेरस व्रततप थाये,
मले मान्युं यम भीती जाये
पूजे कन्या मन कोड पुराये,
तपथी विधवाना दुःख जाये
सेवे सधवा सर्व सुख थाये,
व्हेम, मद अने कुसंप जाये
नमः मातंगी नाम मुख आवे,
भूत पिशाच भय अति दूर जावे
मोढेश्वरी तव पूजन प्रभावे,
सत्य दया तप सौच दिल आवे
कष्ट भंजन मातंगी माता,
बने सर्व ग्रहो सुखदाता
विद्यार्थी मातंगी जप जापे,
वधे विद्या, बुद्धि धन आपे
मातंगी यात्रा अति सुख
आपेकर्म बंधन भवभवना कापे
दलपतराम मात गुण गाये,
उपनाम आनंद कहेवाये
संवत वीस सुडतालीस मांहे,
मातंगी चालीसा आनंद गाये
मातंगी चालीसा दोहा
श्री मोढेश्वरी चालीसा,
भावे रोज भणायवधे विद्या,
धन, सुसंतति, पदारथ चार पमाय
मातंगी चालीसा का महत्व (Mahattva)
- माँ मातंगी वाणी, संगीत, कला और अधिप्रज्ञा (Higher Intelligence) की देवी हैं।
- इनका चालीसा पढ़ने से मन की अशुद्धियाँ दूर होती हैं और विचारों में स्पष्टता आती है।
- पढ़ाई, संगीत, लेखन, कला, वक्तृत्व और आध्यात्मिक उन्नति में विशेष लाभ मिलता है।
- व्यक्ति के भीतर की नकारात्मक ऊर्जा, डर, भ्रम और मानसिक तनाव समाप्त होने लगते हैं।
- साधक की वाणी प्रभावशाली होती है और समाज में मान-सम्मान बढ़ता है।
मातंगी चालीसा के लाभ (Benefits)
- वाणी में मधुरता व प्रभावशाली अभिव्यक्ति प्राप्त होती है।
- पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और कलात्मक क्षेत्रों में सफलता मिलती है।
- मन की अशांति, भ्रम और तनाव कम होता है।
- साधक के जीवन में आकर्षण, करिश्मा और सकारात्मक प्रभाव बढ़ता है।
- करियर, मान-प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
- ज्ञान, बुद्धि और स्मरण शक्ति का विशेष विकास होता है।
मातंगी चालीसा करने की विधि (Vidhi)
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और शांत स्थान पर पूर्व दिशा की ओर बैठें।
- माँ मातंगी की तस्वीर या मूर्ति पर हल्दी, केसर, कुंकुम, फूल (विशेषकर लाल/पीले) अर्पित करें।
- दीपक जलाकर “ॐ ह्रीं मातंग्यै नमः” मंत्र का 9 बार जप करें।
- इसके बाद श्रद्धा, भक्ति और एकाग्रता के साथ मातंगी चालीसा पढ़ें।
- पाठ के बाद देवी को मीठा, फल या नारियल प्रसाद अर्पित करें।
- विद्यार्थी, कलाकार और वक्ता नियमित रूप से, विशेषकर बुधवार और शुक्रवार को पाठ करें।
- अंत में माता से वाणी-सिद्धि, ज्ञान, बुद्धि और जीवन में प्रकाश बढ़ाने की प्रार्थना करें।
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