
सखि आये बसंत बहार पिया नहिं आये चौताल गीत | Sakhi Aaye Basant Bahar Lyrics
सखि आये बसंत बहार पिया नहिं आये ||
फागुन मस्त महीना सखिया मोर जिया ललचाये ||
सब नर नारी जो पागुन गावत,
सखि मोकहं सूम बढ़ाये ||१ ||
ताल मृदंग झांझ डफ बाजे सबको मन हरषाये ||
मैं बिरहिनि सेजियापर बिलखति,
मोहिं अजु मदन तनु छाये ||२ ||
भरभरके पिचकारी मारत नात गोत बिलगाये ||
सखि सब घर घर धूम मचावत,
तहां रंग अबिरन छाये ||३ ||
गोरी देत सभीको सबही ना कोइ काहु लजाये ||
लालबिहारी विरहबस बनिताहो,
सोतो बैठे मनहि सुझाये ||४ ||
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