भगवान विष्णु हमेशा शेषनाग पर क्यों सोते हैं?
जानिए इस ब्रह्मांडीय रहस्य के पीछे छिपी गहराई
जब सृष्टि का प्रारंभ हुआ, तब जल ही जल था।
उसी अनंत जल में भगवान विष्णु योगनिद्रा में थे।
शेष’ का अर्थ है – जो शेष रह जाए
सृष्टि के विनाश के बाद केवल ‘अनंत शेष’ ही शेष रहते हैं।
शेषनाग भगवान विष्णु के ही अवतार हैं।
वो सृष्टि के आधार और संतुलन का प्रतीक हैं।
भगवान विष्णु शेषनाग पर इसलिए शयन करते हैं क्योंकि वह ‘काल’ और ‘अनंतता’ के प्रतीक हैं।
उन पर शयन का अर्थ है — काल पर नियंत्रण।
विष्णु शेषनाग पर ‘क्षीरसागर’ में सोते हैं — जो सृष्टि के संतुलन का प्रतीक है।
वहीं से ब्रह्मा का जन्म होता है।
विष्णु शयन अवस्था में रहते हैं
परंतु उनके भीतर ही सृष्टि, स्थिति और संहार का क्रम चलता रहता है।