
यह चरन सरोज तिहारे अमंगल हारे चौताल गीत | Yah Charan Saroj Tihare Lyrics
यह चरन सरोज तिहारे,अमंगल हारे ||
अरे हे दशरथ के सुवन दयानिधि,दीनबन्धु हितकारे ||
कर धनु-सर सिर मुकुट बिराजत,
कलंगी बहुभाँति सँवारे ||अमंगल हारे ||
अरे कमल-नयन मुख-बयन सुधा-सम, केसर तिलक लिलारे ||
कंठा-कंठ माल-मनि सोभित,
श्रुति-कुण्डल की द्युति न्यारे ||अमंगल हारे ||
अरे कल्प बिरिछ तर कनक सिंघासन, तेहि पर आसन डारे ||
बाम भाग सीता सुठि सोभित,
करिके नव-सात सिंगारे ||अमंगल हारे ||
अरे भरत लखन रिपुदमन खडे़ धरि,चँवर छत्र तरवारे ||
द्विज छोटकुन पंखा भल फेरत,
मारुत-सुत प्रान अधारे ||अमंगल हारे ||
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