हर छठ पर्व पर गाए जाने वाले पारंपरिक छठ गीत वातावरण को दिव्यता से भर देते हैं। इनकी धुनों में आस्था की गहराई और माँ की ममता का अनोखा मेल होता है।
छठी मैया के ऊँची रे अररीया लिरिक्स
छठी मैया के ऊँची रे अररीया,
ओह पर चढ़लो ना जाए।।
छठी मैया के ऊँची रे अररीया,
ओह पर चढ़लो ना जाए।।
लिही न कवन देव कुदरिया,
घटिया दिही न बनाय
लिही न कवन बाबू कुदरिया,
घटिया दिही न बनाय।।
पेहनी न कवन देव पियरिया,
चली अरघ दियाय ।
पेहनी ना कवन बाबू पियरीया,
चली अरघ दियाय।।
काँच ही बाँस बसहर घरवा,
हे कदम जुड़े गाछ,
हे कदम जुड़े गाछ।।
काँच ही बाँस बसहर घरवा,
हे कदम जुड़े गाछ,
हे कदम जुड़े गाछ।।
ताही बसहर सुतेले कवन देव,
गोडे मोड़े चादर तान,
गोडे मोड़े चादर तान।
पैसी जगावेली कवन देई,
उठी स्वामी भईले बिहान,
उठी स्वामी भईले बिहान।।
गईया दुही न भिनुसहरा,
भईले अरघिया के जून,
भईले अरघिया के जून ।।
तीन दिन के भूखली धनिया,
बाड़ी जल बिचवे खाड़,
बाड़ी जल बिचवे खाड़।
थर थर कापेला बदनिया,
ओठवा गई ले झुराय,
ओठवा गई ले झुराय ।।
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