Ganadhipa Chaturthi 2025: गणाधिप संकष्टी चतुर्थी 8 या 9 नवंबर कब है? जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व व पूजा-विधि

Ganadhipa Chaturthi 2025, गणाधिप संकष्टी चतुर्थी 2025
Ganadhipa Chaturthi 2025, गणाधिप संकष्टी चतुर्थी 2025, गणाधिप संकष्टी चतुर्थी 8 या 9 नवंबर कब है

Ganadhipa Chaturthi 2025: हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी व्रत का बहुत विशेष स्थान है। जब यह व्रत मार्गशीर्ष मास में पड़ता है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन भक्त भगवान गणेश के ‘गणाधिप’ स्वरूप की आराधना करते हैं। माना जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा से करने पर सभी प्रकार के संकट, बाधाएँ और कष्ट दूर हो जाते हैं।

Ganadhipa Chaturthi 2025: गणाधिप संकष्टी चतुर्थी 8 या 9 नवंबर कब है? शुभ मुहूर्त, महत्व व पूजा-विधि

Ganadhipa Chaturthi 2025: अब आइए जानते हैं कि साल 2025 में गणाधिप संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाएगी, इसके शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और पूजा विधि क्या हैं।

🪔 गणाधिप संकष्टी चतुर्थी 2025 की तिथि

Ganadhipa Chaturthi 2025: मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह व्रत किया जाता है। इस बार चतुर्थी का आरंभ 8 नवंबर 2025 (शनिवार) की सुबह 07:32 बजे से हो रहा है और यह तिथि 9 नवंबर 2025 (रविवार) की सुबह 04:25 बजे तक रहेगी।
चूंकि चंद्रोदय 8 नवंबर की शाम लगभग 07:59 बजे होगा, इसलिए इस वर्ष व्रत 8 नवंबर को ही रखा जाएगा।

🕉️ पूजन व चंद्रोदय के शुभ मुहूर्त

Ganadhipa Chaturthi 2025: संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही पूरा किया जाता है। इसलिए उसी दिन व्रत रखना शुभ माना गया है, जिस दिन चतुर्थी तिथि में चंद्रोदय होता है।

  • 08 नवंबर 2025 के प्रमुख शुभ समय:
  • ब्रह्म मुहूर्त: 04:53 AM – 05:46 AM
  • प्रातः सन्ध्या: 05:20 AM – 06:38 AM
  • अभिजीत मुहूर्त: 11:43 AM – 12:26 PM
  • विजय मुहूर्त: 01:53 PM – 02:37 PM
  • गोधूलि मुहूर्त: 05:31 PM – 05:57 PM
  • सायं सन्ध्या: 05:31 PM – 06:50 PM
  • अमृत काल: 02:09 PM – 03:35 PM
  • निशीथ काल: 11:39 PM – 12:31 AM (9 नवंबर)

ध्यान रखें कि चंद्रोदय का समय स्थानानुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है, इसलिए अपने क्षेत्र के अनुसार समय की पुष्टि अवश्य कर लें।

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की विशेष रूप से पूजा की जाती है। इस दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को मन की शांति, कार्यों में सफलता और परिवार में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

🕉️ चंद्र दर्शन और पूजा का महत्व

चंद्रोदय के बाद भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करना, दूर्वा चढ़ाना, मोदक का भोग लगाना और दीपदान करना अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसा करने से मनुष्य के जीवन में सुख-शांति आती है और भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

🌺 गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का महत्व

Ganadhipa Chaturthi 2025: यह व्रत भगवान गणेश के ‘गणाधिप’ स्वरूप को समर्पित है। “संकष्टी” शब्द का अर्थ ही है — संकटों को हरने वाला। इसीलिए इस दिन किए गए व्रत और पूजा-पाठ से सभी प्रकार की बाधाएं, रोग-दुःख और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

मान्यता है कि यह व्रत बुद्धि, ज्ञान, सौभाग्य और समृद्धि प्रदान करता है। जो भी भक्त पूरे समर्पण और श्रद्धा के साथ गणपति बप्पा की आराधना करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि स्वयं हनुमान जी ने भी भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने और अद्भुत शक्ति हासिल करने के लिए यह व्रत किया था। इसलिए यह व्रत केवल संकट निवारण ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक बल और ऊर्जा प्राप्ति का भी प्रतीक है।

🪔 गणाधिप संकष्टी चतुर्थी पूजन विधि

🌅 प्रातःकालीन तैयारी

  • सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करें और साफ, पवित्र वस्त्र पहनें।
  • संभव हो तो लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें, ये रंग गणेश जी को अत्यंत प्रिय हैं।

🙏 संकल्प और व्रत

  1. गणेश जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  2. दिनभर निराहार या फलाहार व्रत रखें और मन को संयमित रखें।

🏵️ गणेश पूजा विधि

  • एक साफ चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • उन्हें रोली, अक्षत, दूर्वा घास, लाल पुष्प और दीप अर्पित करें।
  • मोदक, तिल के लड्डू या बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं।

🔱 मंत्र जाप और पाठ

  • पूजन के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • चाहें तो श्री गणेश स्तोत्र या संकटनाशक गणेश स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं।

🌕 संध्या पूजा व चंद्र दर्शन

  • शाम के समय गणेश कथा सुनें या स्वयं पढ़ें।
  • जब चंद्रोदय हो जाए तो चंद्रमा के दर्शन करें और उन्हें अर्घ्य अर्पित करें।

💧 अर्घ्य और पारण

  • चंद्र को जल, दूध, अक्षत और सफेद फूल मिलाकर अर्घ्य दें।
  • इसके बाद व्रत का पारण करें और भगवान गणेश का प्रसाद ग्रहण करें।

इसे भी पढ़ें:

Disclaimer:

Ganadhipa Chaturthi 2025: इस लेख में दी गई सभी धार्मिक और पौराणिक जानकारियाँ प्राचीन ग्रंथों और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका उद्देश्य केवल जनरुचि और आध्यात्मिक जानकारी साझा करना है। स्वास्थ्य या ज्योतिष से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है।

Picture of पवन शास्त्री, साहित्याचार्य (M.A.) - Author

पवन शास्त्री, साहित्याचार्य (M.A.) - Author

भारतीय धर्म, पुराण, ज्योतिष और आध्यात्मिक ज्ञान के शोधकर्ता। Sursarita.in (धर्म कथा गंगा) पर वे सरल भाषा में धार्मिक कथाएँ, राशिफल, पञ्चांग और व्रत विधियाँ साझा करते हैं।

ज्यादा जानें...

Share:

SUBSCRIBE

Loading

नए पाठ:

About Author

pawan shastri

Pawan Shastri

Pawan Shastri is an experienced music teacher and spiritual knowledge expert with 10 years of experience in harmonium, keyboard, singing, and classical music.

He holds an M.A. degree and is also a certified Jyotish Shastri (Astrology Expert). His articles and content aim to share devotional, musical, and spiritual knowledge in a simple, accurate, and emotionally engaging manner.

Pawan Shastri believes that the fusion of devotion in melody and wisdom in knowledge can bring peace, energy, and positivity to everyone’s life.

दिव्यता से जुड़े रहें! हमारे चैनल Dharm Katha Ganga से जुड़कर आप पाएंगे —

  1. 🌿 दैनिक आध्यात्मिक ज्ञान
  2. 🌿 शक्तिशाली मंत्र और भजन
  3. 🌿 सनातन धर्म से प्रेरित अद्भुत कथाएँ
  4. 🌿 व्रत कथाएँ, उपवास मार्गदर्शन और त्योहारों की जानकारी
  5. 🌿 विशेष सामग्री जो आपके जीवन में शांति, सकारात्मकता और भक्ति का संचार करेगी।