Krishna Yogeshwar Dwadashi 2025: मार्गशीर्ष कृष्णा योगेश्वर द्वादशी व्रत कब करें, पूजा विधि, पारण व शुभ मुहूर्त जानें

Krishna Yogeshwar Dwadashi
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Krishna Yogeshwar Dwadashi 2025: यह पावन व्रत हर वर्ष मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के योगेश्वर स्वरूप की पूजा कर भक्त योग, ज्ञान और धर्म के गूढ़ रहस्यों का आशीर्वाद पाते हैं। मार्गशीर्ष में किया गया यह व्रत अत्यंत शुभ एवं कल्याणकारी माना गया है। आइए जानें—योगेश्वर द्वादशी व्रत कब करें, इसकी पूजा विधि, पारण और शुभ मुहूर्त।

Krishna Yogeshwar Dwadashi 2025: मार्गशीर्ष कृष्णा योगेश्वर द्वादशी व्रत कब करें, पूजा विधि, पारण व शुभ मुहूर्त जानें

Krishna Yogeshwar Dwadashi व्रत वर्ष 2025 में 16 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। यह अत्यंत शुभ व्रत भगवान श्रीकृष्ण के योगेश्वर स्वरूप को समर्पित है – वही श्रीकृष्ण जिन्होंने अर्जुन को योग, ज्ञान, धर्म और मोक्ष का सनातन मार्ग समझाकर गीता का दिव्य उपदेश दिया। मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को रखा जाने वाला यह व्रत साधक को मानसिक शांति, आध्यात्मिक प्रगति और धर्ममार्ग पर स्थिरता प्रदान करता है। माना जाता है कि इस दिन श्रीकृष्ण की उपासना करने से जीवन में ज्ञान, विवेक और निर्णय शक्ति बढ़ती है।

Krishna Yogeshwar Dwadashi 2025 कब है?

Krishna Yogeshwar Dwadashi व्रत वर्ष 2025 में 16 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। यह पावन व्रत भगवान श्रीकृष्ण के योगेश्वर स्वरूप को समर्पित है – वही रूप जिसमें उन्होंने गीता में योग, ज्ञान और धर्म का दिव्य प्रकाश फैलाया। यह व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को रखा जाता है, जिसे आध्यात्मिक उन्नति, मनोबल और बुद्धि की तीव्रता बढ़ाने वाला माना गया है।

मार्गशीर्ष कृष्णा योगेश्वर द्वादशी व्रत का पारणा समय 2025

  • Krishna Yogeshwar Dwadashi व्रत का पारणा 17 नवंबर 2025, सोमवार को होगा।
  • शुभ पारणा समय: सुबह 6:45 बजे से 8:54 बजे तक।
  • व्रत रखने वाले भक्त 16 नवंबर को उपवास करते हैं और अगले दिन इस निर्धारित
  • मुहूर्त में ही व्रत का पारण करते हैं। ऐसा करने से व्रत पूर्ण फल, मानसिक स्थिरता और प्रभु श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है।

Krishna Yogeshwar Dwadashi पूजा विधि (Step-by-Step)

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र पहनें।
  • पूजा स्थान पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • श्रीकृष्ण को गंगाजल, अक्षत, चंदन, तुलसी, पीले फूल, धूप और दीप अर्पित करें।
  • गीता का 12वाँ अध्याय (भक्ति योग) या गीता सार पढ़ें।
  • श्रीकृष्ण के “योगेश्वर” स्वरूप का ध्यान करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
  • उपवास में फलाहार या निर्जला व्रत करें (क्षमता अनुसार)।
  • संध्या समय पुनः आरती करें और दिनभर मन को संयमित रखें।

Krishna Yogeshwar Dwadashi व्रत का महत्व

  • यह व्रत ज्ञान, विवेक और मानसिक शक्ति बढ़ाता है।
  • जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।
  • श्रीकृष्ण की कृपा से धर्म, योग, साधना और भक्ति मार्ग में प्रगति मिलती है।
  • जिन लोगों को मन में भ्रम, चिंता या अस्थिरता रहती है, उनके लिए यह व्रत अत्यंत शुभ माना गया है।
  • गीता के उपदेशों को आत्मसात करने का यह सर्वोत्तम दिन है।

शुभ मुहूर्त तालिका (Tithi & Timing)

  • व्रत तिथि 16 नवंबर 2025, रविवार
  • तिथि प्रारंभ 16 नवंबर, सुबह 2:24 बजे
  • तिथि समाप्त 17 नवंबर, सुबह 4:10 बजे
  • पारणा समय सुबह 6:45 बजे – 8:54 बजे

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पवन शास्त्री, साहित्याचार्य (M.A.) - Author

भारतीय धर्म, पुराण, ज्योतिष और आध्यात्मिक ज्ञान के शोधकर्ता। Sursarita.in (धर्म कथा गंगा) पर वे सरल भाषा में धार्मिक कथाएँ, राशिफल, पञ्चांग और व्रत विधियाँ साझा करते हैं।

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Pawan Shastri

Pawan Shastri is an experienced music teacher and spiritual knowledge expert with 10 years of experience in harmonium, keyboard, singing, and classical music.

He holds an M.A. degree and is also a certified Jyotish Shastri (Astrology Expert). His articles and content aim to share devotional, musical, and spiritual knowledge in a simple, accurate, and emotionally engaging manner.

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