
Pitru Mantra: सनातन धर्म में पितरों की पूजा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। श्राद्ध, अमावस्या और पितृ पक्ष के दिनों में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, तर्पण और मंत्र जाप करने से उनके आशीर्वाद सहज रूप में प्राप्त होते हैं। कहा जाता है कि “पितृ प्रसन्न हों, तो जीवन की हर रुकावट स्वतः समाप्त होने लगती है।
Pitru Mantra: पितरों को खुश करने का शक्तिशाली पितृ मन्त्र – जानें जाप के अद्भुत लाभ और सही विधि
Pitru Mantra: नियमित या विशेष तिथियों पर किया गया पितृ तर्पण और मंत्र जाप, मन की शांति, परिवार में सुख-समृद्धि, और वंश की उन्नति में अत्यंत सहायक है।
1. पितृ तर्पण क्या है? – महत्व एवं पूजा विधि
‘तर्पण’ शब्द का अर्थ है—तृप्त करना। पितृ तर्पण में तिल, जल और कुशा के माध्यम से अपने पितरों को श्रद्धा और कृतज्ञता सहित जल अर्पित किया जाता है। यह कर्म मुख्यतः पितृ पक्ष में किया जाता है, परंतु प्रतिमास अमावस्या पर भी अत्यंत फलदायी माना गया है।
सनातन परंपरा में पितृ तर्पण को आत्मिक कर्तव्य कहा गया है। जो संतान अपने पितरों को तर्पण और पूजन करती है, उसे उनके आशीर्वाद से:
- घर में शांति
- आर्थिक स्थिरता
- संतान-सुख
- और दीर्घायु
प्राप्त होती है।
2. पितृ तर्पण और पितृ पूजन का महत्व
- पितरों की सूक्ष्म ऊर्जा हमारे जीवन और परिवार पर प्रभाव डालती है।
- तर्पण से उन्हें संतोष और शांति मिलती है, जिससे पितृ दोष शांत होता है।
- संतानहीनता, विवाह में देरी, आर्थिक बाधाएँ—इनसे मुक्ति मिलती है।
- यह कर्म पितृ ऋण से मुक्ति का श्रेष्ठ उपाय है।
- पितृ पूजन हमारी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ता है।
3. पितरों को खुश क्यों करना चाहिए?
सनातन धर्म में पितरों को देवताओं के समान दर्जा दिया गया है।
कहा गया है—
“पितृ प्रसन्न, तो देवता प्रसन्न।”
पितृ ऋण से मुक्ति
जीवन के तीन ऋणों में सबसे महत्वपूर्ण है पितृ ऋण, जिसे तर्पण, श्राद्ध और जाप द्वारा चुकाया जाता है।
जीवन में सुख-समृद्धि के लिए
पितर संतुष्ट हों तो संतान, यश, धन और स्वास्थ्य मिलता है।
पितृ दोष से बचाव
यदि पितर अप्रसन्न हों या कोई कर्म अधूरा रह जाए, तो पितृ दोष उत्पन्न होता है।
तर्पण और मंत्र जाप से यह दोष शांत होता है।
कुल व कर्म शुद्धि
भटकी हुई आत्माओं को शांति मिलती है, जिससे संपूर्ण कुल पर शुभ प्रभाव पड़ता है।
वंश परंपरा की रक्षा
गरुड़ पुराण कहता है—
“विधिपूर्वक श्राद्ध से प्रसन्न पितर संतान को सुख और शुभ फल देते हैं।”
4. पितरों को खुश करने का पितृ मन्त्र
पितरों की प्रसन्नता और शांति के लिए सबसे प्रभावी पितृ मन्त्र है—
**“ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः॥”**
यह मंत्र तर्पण, श्राद्ध और पितृ पूजन के समय बोला जाता है।
यह पितरों को समर्पित ‘स्वधा’ ऊर्जा को जागृत करता है।
इसके अलावा एक और शुभ पितृ मन्त्र है –
**“ॐ पितृ गणाय विद्महे
जगत् धारिणी धीमहि
तन्नो पितृः प्रचोदयात्॥”**
यह मंत्र पितरों की कृपा, सुरक्षा और मार्गदर्शन की प्रार्थना के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
5. पितरों के लिए मंत्र जाप की विधि (Step-by-Step)
1. स्नान और शुद्धता
- प्रातः स्नान करें
- साधारण, हल्के रंग के वस्त्र पहनें
- मन और वाणी शांत रखें
2. पूजा स्थान
- घर का शांत कोना चुनें
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें
- सफेद वस्त्र बिछाकर पितरों की तस्वीर/कुश/तिल/जल रखें
3. सामग्री तैयार करें
- जल से भरा पात्र
- काले तिल
- कुशा
- पुष्प
- दीपक और धूप
- रुद्राक्ष माला (यदि हो)
4. संकल्प
हाथ में जल लेकर कहें—
“मैं अमुक गोत्र, अमुक नाम से, अपने पितरों की शांति और मोक्ष हेतु यह जाप कर रहा/रही हूँ। कृपया इसे स्वीकार करें।”
5. मंत्र जाप
- किसी एक मंत्र का चयन करें
- 11, 21 या 108 बार जाप करें
- हर बार मन में पितरों का स्मरण करें
6. तर्पण
जाप पूरी होने पर, काले तिल और जल को धीरे-धीरे धरती पर अर्पित करें।
7. समर्पण और आशीर्वाद प्रार्थना
अंत में कहें—
“हे पितरों, आपकी कृपा और आशीष सदैव मेरे परिवार पर बना रहे।”
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