ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्रम् (Rinmukti Shri Ganesha Stotram) भगवान गणेश को समर्पित अत्यंत शक्तिशाली और कल्याणकारी स्तोत्र है।
ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्रम्: कर्ज से मुक्ति देने वाला शक्तिशाली गणेश स्तोत्र | Rinmukti Shri Ganesha Stotram
इसके नाम से ही स्पष्ट है कि यह स्तोत्र विशेष रूप से कर्ज और आर्थिक संकट से मुक्ति दिलाने वाला है। यदि कोई व्यक्ति प्रातःकाल शुद्ध भाव से इस स्तोत्र का लगातार 6 माह तक पाठ करता है, तो न केवल ऋण से छुटकारा मिलने लगता है, बल्कि मन को शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा भी प्राप्त होती है। नियमित पाठ से धनप्राप्ति के मार्ग खुलते हैं और जीवन में समृद्धि बढ़ती है।
ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्रम् के लाभ (Labh / Benefits)
- यह स्तोत्र कर्ज, धन-संकट और आर्थिक बाधाओं को दूर करने में अत्यंत प्रभावी है।
- व्यक्ति को नई आय के अवसर, रोजगार और व्यवसाय में स्थिरता देता है।
- अचानक आने वाली वित्तीय समस्याएँ, कोर्ट-कचहरी और व्यापारिक रुकावटें समाप्त होती हैं।
- घर में लक्ष्मी और समृद्धि का स्थायी वास होता है।
- साधक का मन शांत, साहसी और कार्यों में सफलता प्राप्त करने वाला बनता है।
- परिवार में कलह, तनाव और मानसिक दबाव कम होकर धन-संबंधी शांति मिलती है।
- लगातार 6 माह पाठ करने पर जीवनभर की वित्तीय स्थिरता प्राप्त होती है।
ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्रम् | Rinmukti Shri Ganesha Stotram
॥ विनियोग ॥
ॐ अस्य श्रीऋणविमोचनमहागणपति-स्तोत्रमन्त्रस्य
शुक्राचार्य ऋषिः ऋणविमोचनमहागणपतिर्देवता
अनुष्टुप् छन्दः ऋणविमोचनमहागणपतिप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः।
॥ स्तोत्र पाठ ॥
ॐ स्मरामि देवदेवेशंवक्रतुण्डं महाबलम्।
षडक्षरं कृपासिन्धुंनमामि ऋणमुक्तये॥1॥
महागणपतिं वन्देमहासेतुं महाबलम्।
एकमेवाद्वितीयं तुनमामि ऋणमुक्तये॥2॥
एकाक्षरं त्वेकदन्तमेकंब्रह्म सनातनम्।
महाविघ्नहरं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥3॥
शुक्लाम्बरं शुक्लवर्णंशुक्लगन्धानुलेपनम्।
सर्वशुक्लमयं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥4॥
रक्ताम्बरं रक्तवर्णंरक्तगन्धानुलेपनम्।
रक्तपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥5॥
कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णंकृष्णगन्धानुलेपनम्।
कृष्णयज्ञोपवीतं चनमामि ऋणमुक्तये॥6॥
पीताम्बरं पीतवर्णपीतगन्धानुलेपनम्।
पीतपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥7॥
सर्वात्मकं सर्ववर्णंसर्वगन्धानुलेपनम्।
सर्वपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥8॥
एतद् ऋणहरं स्तोत्रंत्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।
षण्मासाभ्यन्तरे तस्यऋणच्छेदो न संशयः॥9॥
सहस्रदशकं कृत्वाऋणमुक्तो धनी भवेत्॥
॥ इति रुद्रयामले ऋणमुक्ति श्री गणेशस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
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ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्रम् विधि (Rinmukti Shri Ganesha Stotram Vidhi)

- ऋणमुक्ति स्तोत्र का पाठ शुक्ल पक्ष के बुधवार से शुरू करना विशेष शुभ माना जाता है।
- पाठ से पहले साधक को शुद्धता एवं स्वच्छता का पालन करना चाहिए।
- स्नान करके स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र पहनें।
- अपने घर में गणेश जी की तांबे की मूर्ति या फोटो स्थापित करें।
- भगवान गणेश को दूर्वा (दूब घास), लाल पुष्प और अक्षत अवश्य अर्पित करें।
- गणेश जी को मिठाई, मोदक, गुड़ या फल का भोग लगाएँ।
- पूजन के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसान आसन पर बैठें—यह अत्यंत शुभ माना जाता है।
- अब श्रद्धा के साथ ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्रम् का पाठ आरंभ करें।
- इस स्तोत्र का नियमित 6 माह तक जाप करने से लाभ निश्चित रूप से मिलता है।
- पाठ समाप्त होने के बाद भगवान गणेश की आरती करें, फिर परिवार की सुख-शांति एवं आर्थिक उन्नति के लिए आशीर्वाद माँगें।
- अंत में भगवान को लगाया हुआ भोग परिवार में बाँट दें।












