Shri Ram Ashtakam Mantra in Hindi: श्री राम अष्टकम मंत्र (Shri Ram Ashtakam Mantra) की रचना महर्षि वेदव्यास जी द्वारा की गई है। यह भगवान श्री राम के प्रति भक्ति, आदर्श, प्रेम और मन की शांति को व्यक्त करने वाला अत्यंत लोकप्रिय और प्रभावशाली स्तोत्र है। इस अष्टकम में भगवान श्री राम की महिमा, उनके दिव्य गुण, चरित्र और जीवन दर्शन का सुंदर वर्णन मिलता है।
श्री राम अष्टकम मंत्र: मनोकामना पूर्ण करने वाला दिव्य राम स्तोत्र | Shri Ram Ashtakam Mantra in Hindi
Shri Ram Ashtakam Mantra in Hindi: श्री राम अष्टकम मंत्र भगवान श्री राम को समर्पित है। श्री राम जी, भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। इसका पाठ विशेष रूप से प्रातःकाल किया जाता है, जिससे भगवान श्री राम और हनुमान जी अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों को उनका कृपाशीर्वाद प्राप्त होता है। नियमित पाठ से मन को शांति, शक्ति, साहस और जीवन में धर्म के प्रति दृढ़ता प्राप्त होती है।
श्री राम अष्टकम मंत्र पाठ करने की विधि (Vidhi)
- श्री राम अष्टकम का पाठ शुक्ल पक्ष के किसी भी मंगलवार या रविवार से प्रारम्भ करना शुभ माना जाता है।
- पाठ करने से पहले साधक को शरीर व मन दोनों की शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए।
- स्नान कर पीले या साफ-सुथरे वस्त्र पहनें और पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- अपने सामने भगवान श्रीराम की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- राम नाम का स्मरण करते हुए घी का दीपक जलाएं और पुष्प अर्पित करें।
- अब “ॐ श्री रामाय नमः” का मानसिक जप कर मन को स्थिर करें।
- फिर पूरे भाव से श्री राम अष्टकम मंत्र का पाठ करें।
- पाठ के पश्चात श्रीराम, सीता माता, लक्ष्मण और हनुमान जी की आरती करें।
- भोग अर्पित कर भगवान से परिवार की सुख-शांति, बल, बुद्धि और रक्षा का आशीर्वाद माँगें।
- अष्टकम का नियमित रूप से कम से कम 48 दिनों तक पाठ करने से विशेष फल मिलता है।
- अंत में प्रसाद परिवार में बाँट दें।
श्री राम अष्टकम मंत्र | Shri Ram Ashtakam Mantra
भजे विशेषसुन्दरं समस्तपापखण्डनम् ।
स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव राममद्वयम् ॥ १॥
जटाकलापशोभितं समस्तपापनाशकम् ।
स्वभक्तभीतिभङ्जनं भजेह राममद्वयम् ॥ २॥
निजस्वरूपबोधकं कृपाकरं भवापहम् ।
समं शिवं निरञ्जनं भजेह राममद्वयम् ॥ ३॥
सहप्रपञ्चकल्पितं ह्यनामरूपवास्तवम् ।
निराकृतिं निरामयं भजेह राममद्वयम् ॥ ४॥
निष्प्रपञ्चनिर्विकल्पनिर्मलं निरामयम्।
चिदेकरूपसन्ततं भजेह राममद्वयम् ॥ ५॥
भवाब्धिपोतरूपकं ह्यशेषदेहकल्पितम् ।
गुणाकरं कृपाकरं भजेह राममद्वयम् ॥ ६॥
महावाक्यबोधकैर्विराजमनवाक्पदैः ।
परब्रह्म व्यापकं भजेह राममद्वयम् ॥ ७॥
शिवप्रदं सुखप्रदं भवच्छिदं भ्रमापहम् ।
विराजमानदैशिकं भजेह राममद्वयम् ॥ ८॥
रामाष्टकं पठति यः सुकरं सुपुण्यं
व्यासेन भाषितमिदं शृणुते मनुष्यः ।
विद्यां श्रियं विपुलसौख्यमनन्तकीर्तिं
सम्प्राप्य देहविलये लभते च मोक्षम् ॥ ९॥
॥ इति श्रीव्यासविरचितं रामाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
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श्री राम अष्टकम मंत्र के लाभ (Benefits)

- दुख, भय और मानसिक तनाव दूर करता है – मन को शांति और संतुलन मिलता है।
- जीवन की बाधाएँ और रुकावटें समाप्त होती हैं – कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
- रोग, शोक और कष्टों से रक्षा – श्रीराम की कृपा से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- परिवार में प्रेम, सद्भाव और सकारात्मक वातावरण बढ़ाता है।
- आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है – मन मजबूत और साहसी बनता है।
- श्रीराम के चरणों में भक्ति प्रबल होती है और जीवन में धर्म, साहस और सत्य का वास होता है।












