
Tilak Lagane Ka Mantra: भारतीय संस्कृति में तिलक लगाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का जागरण है।
तिलक मन, बुद्धि और आत्मा को पवित्र करता है तथा दिव्यता से जोड़ता है।
Tilak Lagane Ka Mantra: तिलक लगाने का मंत्र – सकारात्मक ऊर्जा, शांति और दिव्य शक्ति पाने का आसान उपाय
Tilak Lagane Ka Mantra: तिलक लगाने के समय बोले जाने वाले मंत्र शरीर, मन और विचारों में सकारात्मक कंपन उत्पन्न करते हैं, जिससे व्यक्ति के अंदर शांति, आत्मविश्वास और दिव्य शक्ति का संचार होता है।
आइए जानते हैं—तिलक का महत्व, प्रकार, विधि और वह दिव्य मंत्र जो हर दिन आपको नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
1. तिलक लगाने की परंपरा एवं महत्व
धार्मिक महत्व
माथे का आज्ञा चक्र (तीसरी आंख) ज्ञान, एकाग्रता और अंतर्दृष्टि का केंद्र है। तिलक इस चक्र को सक्रिय करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर दिव्यता को आकर्षित करता है।
पूजा-पाठ, उत्सव, यात्राओं और शुभ अवसरों पर तिलक लगाना भगवान की कृपा का प्रतीक माना जाता है।
सामाजिक महत्व
तिलक सम्मान और आदर का चिह्न है।
मेहमानों का स्वागत तिलक से किया जाता है, और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत तिलक से ही होती है।
आध्यात्मिक महत्व
तिलक मन को स्थिर करता है, विचारों को शांत करता है और ध्यान की क्षमता बढ़ाता है।
नियमित रूप से तिलक लगाने से आत्मबल, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है।
2. तिलक लगाने के प्रकार
- चंदन का तिलक – शांति, ठंडक, आत्मविश्वास
- कुमकुम/रोली – शक्ति, ऊर्जा, उत्साह
- भस्म (राख) – वैराग्य, स्थिरता, आध्यात्मिक उन्नति
- केसर – शुभता, मंगल कार्य, यात्रा
- गोपी चंदन – वैष्णव संप्रदाय का पवित्र तिलक
- अष्टगंध – विद्या, बुद्धि और तेजस्विता
3. तिलक लगाने की विधि
1. स्वच्छता और मन की शुद्धि
तिलक लगाने से पहले हाथ और चेहरा धो लें।
क्रोध, तनाव या नकारात्मक विचारों को छोड़कर शांत मन बनाएँ।
2. सामग्री तैयार रखें
चंदन, कुमकुम, भस्म, रोली या अष्टगंध में से जो भी आपका तिलक हो, उसे पूजा थाली में रखें।
3. अनामिका से तिलक लगाना सर्वश्रेष्ठ
अनामिका (रिंग फिंगर) को पवित्र माना जाता है।
थोड़ा जल या गुलाबजल लगाकर तिलक सामग्री को लें।
4. तिलक लगाते समय मंत्र का उच्चारण करें
ईश्वर का नाम लेते हुए तिलक लगाना अत्यंत फलदायक माना गया है।
उदाहरण:
“ॐ केशवाय नमः”
“ॐ नारायणाय नमः”
“ॐ गोविंदाय नमः”
5. तिलक का स्थान और आकार
तिलक हमेशा भौंहों के बीच आज्ञा चक्र पर लगाएं।
आकार – ऊर्ध्वपुंड, त्रिपुंड, गोल, लंबी रेखा आपकी श्रद्धा के अनुसार हो सकता है।
6. तिलक के बाद प्रणाम करें
दोनों हाथ जोड़कर ईश्वर को प्रणाम करें और मन में शुभ संकल्प लें—
“आज का दिन शांत, शुभ और सफल हो।”
4. तिलक लगाने का मूल मंत्र
तिलक लगाने का मंत्र
‘केशवानन्द गोविन्द वाराह पुरुषोत्तम।
पुण्यं यशस्यमायुष्यं तिलकं मे प्रसीदतु।।
कान्तिं लक्ष्मीं धृतिं सौख्यं सौभाग्यमतुलं बलम्।
ददातु चन्दनं नित्यं सततं धारयाम्यहम्।’
5. तिलक लगाते समय बोले जाने वाले अन्य दिव्य मंत्र
- मस्तक पर – “ॐ श्री केशवाय नमः”
- कंठ पर – “ॐ श्री गोविंदाय नमः”
- छाती पर – “ॐ श्री माधवाय नमः”
- दाहिनी भुजा पर – “ॐ गोविन्दाय नमः”
- बाईं भुजा पर – “ॐ विष्णवे नमः”
- शिखा पर – “ॐ श्री वासुदेवाय नमः”
इन मंत्रों से शरीर के हर केंद्र में दिव्य ऊर्जा जागृत होती है।
तिलक लगाने का मंत्र | सभी प्रकार तिलक मंत्र
केशवानन्त गोविंद बाराह सर्वोच्च।
पुण्यं यशस्यमा युष्यं तिलकं मे प्रसीदतु ॥
का न्ति लक्ष्मीं धृतिं सौ ख्यं सौ भा ग्यमतुलं बलम्।
ददा तु चंदनं नि त्यं सततं धा रया म्यहम् ॥
स्वयं को तिलक लगाने का मंत्रमं
ॐ चंदनस्य महत्पुण्यं पवि त्रं पा पना शनम्।
आपदां हरते नि त्यं, लक्ष्मी स्ति ष्ठति सर्वदा ॥
माताओं को तिलक लगाने का मंत्र
1.ॐ सर्वमंगल मां गल्ये शि वे सर्वा र्थसा धि के।
शरण्ये त्रयम्बके गौ री ना रा यणी नमो स्तुते॥
2.ॐ देहि सौ भा ग्यं आरो ग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्वि षो ङहि ॥
3.ॐ जयंती मंगला का ली भद्रका ली कपा लि नी ।
दुर्गा क्षमा शि वा धा त्री स्वा हा स्वधा नमो ऽस्तुते ॥
पुरुषों को तिलक लगाने का मंत्र
1. ॐ भद्रमस्तु शि वं चा स्तु महा लक्ष्मिः प्रसी दतु।
रक्षन्तु त्वां सदा देवाः सम्पदाः सन्तु सर्वदा ॥
2.सपत्ना दुर्गः पा पा दुष्ट सत्वा द्युपद्रवाः ।
तमा ल पत्र मा लो क्यः नि ष्प्रभा वा भवन्तु ते ॥
स्त्रियों को तिलक लगाने का मंत्रमं
श्री श्चते लक्ष्मीश्चपत्न्या व्होरात्रे पाश्र्वे नक्षत्राणि रूपमश्वि नौव्यात्तम्।
इष्ण्निषां मम ईशां सर्व लो कमयी षां ॥
कन्याओं को तिलक लगाने का मंत्रमं
ॐ अंबे अंबिके अंबालिके नामानयति कश्चन।
सस्सत्यश्वकः सुभद्रि कां काम्पिल वा सि नि म् ॥
ॐ या वत् गंगा कुरूक्षेत्रे या वत् ति ष्ठति मेदनी ।
या वत् रा मकथा लो के ता वत् जी वतु आयुः ॥
ब्राह्मणों को तिलक लगाने का मंत्र
ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः ।
स्वस्ति नास्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः । स्वस्ति नो बृहस्पति रधा तु ॥
तिलक लगाने के प्रमुख लाभ
- मानसिक शांति और स्थिरता
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार
- आत्मविश्वास और तेज में वृद्धि
- आध्यात्मिक उन्नति और ध्यान में सफलता
- नकारात्मक विचारों व बाधाओं से सुरक्षा
- शुभता और सौभाग्य का आगमन
प्रतिदिन तिलक लगाना आत्मिक शुद्धि, मानसिक शक्ति और दिव्य संरक्षण का सरल और प्रभावी तरीका है।
सही मंत्र के साथ तिलक लगाने से आपके जीवन में शांति, सामर्थ्य और सौभाग्य का प्रभाव तुरंत दिखाई देने लगता है।
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