
toilet bathroom vastu dosh: अक्सर हम घर बनवाते समय रसोई, पूजा या शयनकक्ष की दिशा पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन टॉयलेट और बाथरूम की स्थिति को साधारण मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार यही सबसे बड़ी भूल है।
टॉयलेट और बाथरूम का गलत स्थान कर रहा है कंगाल! वास्तु के इस दोष से आती है बीमारी और धन हानि दोनों
toilet bathroom vastu dosh: घर में गलत दिशा में बना शौचालय या स्नानघर न केवल धन हानि, बल्कि बीमारी, तनाव और रिश्तों में दरार का भी कारण बन सकता है। यहां जानिए कैसे टॉयलेट-बाथरूम का वास्तु दोष धीरे-धीरे जीवन की स्थिरता और सुख को निगल लेता है — और इससे बचने के सही उपाय क्या हैं।
टॉयलेट का गलत स्थान और उसका असर
वास्तु के अनुसार टॉयलेट दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में नहीं होना चाहिए। ये दोनों दिशाएँ घर की स्थिरता और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ी हैं।
१. अगर शौचालय इन जगहों पर है तो —
- परिवार के सदस्यों के बीच मानसिक तनाव बढ़ता है,
- धन टिकता नहीं, और
- बार-बार छोटी-बड़ी बीमारियाँ बनी रहती हैं।
उपाय
- अगर घर पहले से बना हुआ है और बदलाव संभव नहीं, तो —
- टॉयलेट में कभी भी लीक या रिसाव न होने दें,
- दरवाज़ा हमेशा बंद रखें,
- और सुगंधित नमक या कपूर का प्रयोग करें, ताकि नकारात्मक ऊर्जा निष्क्रिय हो सके।
2. बाथरूम का दोष भी रोकता है लक्ष्मी प्रवाह
बाथरूम में जल तत्व सक्रिय रहता है। जब यह गलत दिशा में होता है, तो “धन की ऊर्जा” घर से बहने लगती है।
कौन-सी दिशा सही है?
बाथरूम के लिए पश्चिम या उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) दिशा सबसे उत्तम मानी गई है। यह दिशा चलायमान ऊर्जा की होती है, जो जल प्रवाह और शुद्धि दोनों को संतुलित करती है।
उपाय
- बाथरूम में हल्का नीला या सफेद रंग प्रयोग करें।
- किसी भी कोने में गंदगी या रुका हुआ पानी न रहने दें।
- बाथरूम के बाहर छोटा पीला बल्ब जलाना भी शुभ माना गया है।
3. जल रिसाव अर्थात धन रिसाव
वास्तु में कहा गया है — “जहाँ पानी बहता है, वहाँ धन भी बह जाता है।” अगर आपके घर में पाइप लीक कर रहे हैं या नल से लगातार टपकाव हो रहा है, तो यह संकेत है कि लक्ष्मी धीरे-धीरे घर से जा रही हैं।
उपाय
- घर की पाइपलाइन की नियमित जाँच करें।
- बाथरूम की टंकी और सीलिंग से टपकाव बिल्कुल न होने दें।
- हर सोमवार को गंगाजल या नमक वाले पानी से बाथरूम पोछें — यह ऊर्जा को शुद्ध करता है।
4. टॉयलेट-बाथरूम के पास पूजा स्थान न रखें
कई लोग जगह की कमी में पूजा-घर को टॉयलेट के पास बना लेते हैं। वास्तु के अनुसार यह अत्यंत अशुभ संयोजन है। यह न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा को बाधित करता है, बल्कि व्यक्ति के कर्मफल में असंतुलन भी लाता है।
उपाय
- पूजा-घर को हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में रखें।
- अगर टॉयलेट नज़दीक है, तो बीच में लकड़ी की ऊँची अलमारी या पर्दा लगाएँ।
5. शौचालय की ऊर्जा को शुद्ध करने के सरल उपाय
- टॉयलेट में हर शुक्रवार नमक का कटोरा रखें और सप्ताह में बदलें।
- सुगंधित धूप या कपूर जलाएँ।
- टॉयलेट की दीवार पर हरे पौधे या वास्तु यंत्र की फोटो लगाना शुभ माना गया है।
- बाथरूम के फर्श पर नीले रंग का छोटा मैट रखें — यह जल तत्व को संतुलित करता है।
टॉयलेट और बाथरूम भले ही घर का साधारण हिस्सा लगें, पर वही स्थान जीवन की ऊर्जा, स्वास्थ्य और धन-संतुलन का आधार हैं।
यदि ये जगहें गलत दिशा में हैं या गंदगी से भरी रहती हैं, तो लक्ष्मी धीरे-धीरे घर से विदा ले लेती हैं।
वास्तु के ये छोटे-छोटे बदलाव न केवल धन स्थिर करते हैं, बल्कि घर में शांति, स्वास्थ्य और सकारात्मकता भी बढ़ाते हैं।












