
Tulsi Ko Jal Dene Ka Mantra: भारतीय संस्कृति में तुलसी को केवल एक पौधा नहीं, बल्कि साक्षात देवी का स्वरूप माना गया है। ‘तुलसी माता’ का पूजन हर घर में सुख, शांति और दिव्य ऊर्जा का आधार माना जाता है।
तुलसी में जल देने का मंत्र – इसके चमत्कारी लाभ और सही पूजन-विधि
Tulsi Ko Jal Dene Ka Mantra: तुलसी के पास बैठकर दीप जलाना, जल अर्पित करना और मंत्र पढ़ना वातावरण को पवित्र तथा मन को शांत करता है।
नीचे तुलसी माता से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों के सरल और स्पष्ट उत्तर दिए गए हैं –
1. तुलसी को हिंदू धर्म में ‘मां’ का दर्जा क्यों मिला है?
तुलसी माता को मातृ रूप में पूजने के कई आध्यात्मिक और पौराणिक कारण हैं —
(1) पौराणिक मान्यता
Tulsi Ko Jal Dene Ka Mantra: तुलसी का संबंध भगवान विष्णु से माना गया है। कथा के अनुसार, तुलसी पूर्व जन्म में ‘वृंदा’ नाम की अत्यंत सती और धर्मपरायण स्त्री थीं। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें तुलसी के पवित्र रूप में अवतरित होने का वरदान दिया। इसीलिए तुलसी को ‘विष्णुप्रिया’ कहा जाता है और विष्णु-पूजन में तुलसी दल अनिवार्य माना गया है।
(2) देवी लक्ष्मी का स्वरूप
Tulsi Ko Jal Dene Ka Mantra: अन्य मान्यताओं में तुलसी को लक्ष्मी का ही अवतार बताया गया है। जिस घर में तुलसी होती है, वहाँ स्वाभाविक रूप से लक्ष्मी का वास माना जाता है।
(3) औषधीय गुण
आयुर्वेद में तुलसी को “संजीवनी” की उपाधि दी गई है।
इसमें –
- एंटी-बैक्टीरियल
- एंटी-वायरल
- तनाव दूर करने वाले
गुण पाए जाते हैं। यह शरीर व मन दोनों को स्वस्थ रखती है।
(4) नकारात्मक ऊर्जा का नाश
तुलसी की सुगंध वातावरण से बुरी शक्तियों और नेगेटिव एनर्जी को दूर करती है।
इसीलिए इसे घर की रक्षा करने वाली माता कहा गया है।
2. तुलसी को जल क्यों चढ़ाया जाता है?
- तुलसी में जल देना सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि दिव्य ऊर्जा को सक्रिय करने का तरीका है—
- जल जीवन का प्रतीक है, इसलिए इसे अर्पित करना प्रकृति के प्रति आभार है।
- पौधे का पोषण होता है, जिससे वह सकारात्मक ऊर्जा देता रहता है।
- भगवान विष्णु व लक्ष्मी को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ उपाय माना गया है।
- घर के वातावरण में शुद्धता और पवित्रता बढ़ती है।
- नियमित जल अर्पण से मनोकामनाएँ पूर्ण होने की मान्यता है।
3. तुलसी में जल देने का मंत्र
मुख्य मंत्र (सबसे प्रभावी)
“महाप्रसाद जननी सर्वसौभाग्यवर्धिनी।
आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते॥”
साधारण एवं श्रेष्ठ मंत्र
“ॐ सुभद्राय नमः”
अर्थ: हे तुलसी माता, आप सौभाग्य देने वाली, रोगों को हरने वाली और दिव्य प्रसाद की जननी हैं। मैं आपको बार-बार प्रणाम करता हूँ।
मंत्र का जाप करते हुए जल अर्पित करने से तुलसी माता की कृपा तुरंत प्राप्त होती है।
4. तुलसी में जल देने का शुभ समय और दिन
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त – सबसे उत्तम
सुबह सूर्योदय से दोपहर 12 बजे तक जल देना विशेष फलदायी
किन दिनों जल न दें?
- रविवार – माना जाता है कि इस दिन तुलसी माता व्रत रखती हैं।
- एकादशी – विष्णु उपवास माना जाता है।
- सूर्यास्त के बाद – तुलसी को छूना या जल देना वर्जित है।
5. तुलसी में जल देने की सही विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- एक साफ लोटे में शुद्ध जल भरें।
- तुलसी माता के सामने हाथ जोड़कर प्रणाम करें।
- मंत्र का जाप करें – “ॐ सुभद्राय नमः”
- धीरे-धीरे जड़ों में जल अर्पित करें।
- 3 या 7 बार तुलसी की परिक्रमा करें।
- अंत में मन की प्रार्थना करें और आशीर्वाद माँगें।
Tulsi Ko Jal Dene Ka Mantra: तुलसी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि दिव्य उपस्थिति का जीवित स्वरूप है। प्रतिदिन तुलसी को जल अर्पित करने से नकारात्मकता दूर होती है, घर में सुख-समृद्धि आती है और मन को शांति मिलती है।
Tulsi Ko Jal Dene Ka Mantra: यह प्रकृति से जुड़ने और ईश्वरीय ऊर्जा को अपने जीवन में सक्रिय करने का सरल और शक्तिशाली मार्ग है।
इसे भी पढ़ें:
- शनिवार को जरूर करें शनिदेव मंत्र जाप – खुलेंगे भाग्य, दूर होंगी रुकावटें
- पदोन्नति पाने के लिए मंत्र – करियर में सफलता और प्रमोशन का सिद्ध उपाय
- अकाल मृत्यु से बचाव का शक्तिशाली मंत्र – जानें जाप के दिव्य लाभ और सही विधि
- गणपति अथर्वशीर्ष – मंत्र पाठ विधि और लाभ
- श्री राम अष्टकम मंत्र: मनोकामना पूर्ण करने वाला दिव्य राम स्तोत्र
- महामृत्युंजय मंत्र: स्तोत्र, जाप, विधि, अर्थ और महत्व
- भोग अर्पित करने का मंत्र, सही विधि और महत्व | भगवान को भोग लगाने के चमत्कारी लाभ












