Shri Hanumat Tandava Stotram: संकट मोचन हनुमानाष्टक (Sankatmochan Hanuman Ashtak) भगवान श्री हनुमान जी को समर्पित एक अत्यंत लोकप्रिय और शक्तिशाली स्तोत्र है। इसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। यह स्तोत्र हनुमान जी के अद्भुत बल, भक्तों के संकट हरने की शक्ति और उनके दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है।
संकट मोचन हनुमानाष्टक: सभी दुख-आपदाओं को दूर करने वाला शक्तिशाली स्तोत्र | Sankatmochan Hanuman Ashtak
Shri Hanumat Tandava Stotram: इसका पाठ मंगलवार और शनिवार, विशेषकर प्रातः काल, अत्यंत शुभ माना जाता है। “संकट मोचन” नाम की तरह ही, इस स्तोत्र का निष्ठापूर्वक पाठ करने से हनुमान जी सभी कठिनाइयों, भय, रोग और संकटों का नाश करते हैं तथा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।
संकट मोचन हनुमानाष्टक करने की विधि (Vidhi)
- संकट मोचन हनुमानाष्टक का पाठ मंगलवार या शनिवार से शुरू करना शुभ माना जाता है।
- स्नान के बाद स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें।
- हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक, धूप और लाल पुष्प अर्पित करें।
- हनुमान जी को चने-गुड़, सिंदूर और जनेऊ अर्पित करना अत्यंत शुभ है।
- पाठ शुरू करने से पहले “ॐ हनुमते नमः” मंत्र का 11 बार जाप करें।
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके शांत मन से हनुमानाष्टक का पाठ करें।
- पाठ के बाद हनुमान चालीसा और बजरंग बाण पढ़ना अतिरिक्त शुभ माना जाता है।
- अंत में श्रीराम-हनुमान आरती करें और प्रसाद ग्रहण कर परिवार में बाँटें।
- लगातार 21 या 40 दिनों तक पाठ करने से चमत्कारिक अनुभूति होती है।
संकट मोचन हनुमानाष्टक (Sankatmochan Hanuman Ashtak)
॥ हनुमानाष्टक ॥
बाल समय रवि भक्षी लियो तब,
तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात न टारो ।
देवन आनि करी बिनती तब,
छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो ॥ १ ॥
बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो ।
चौंकि महामुनि साप दियो तब,
चाहिए कौन बिचार बिचारो ।
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो ॥ २ ॥
अंगद के संग लेन गए सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु,
बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।
हेरी थके तट सिन्धु सबै तब,
लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥ ३ ॥
रावण त्रास दई सिय को सब,
राक्षसी सों कही सोक निवारो ।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
जाए महा रजनीचर मारो ।
चाहत सीय असोक सों आगि सु,
दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ॥ ४ ॥
बान लग्यो उर लछिमन के तब,
प्राण तजे सुत रावन मारो ।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।
आनि सजीवन हाथ दई तब,
लछिमन के तुम प्रान उबारो ॥ ५ ॥
रावन युद्ध अजान कियो तब,
नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,
मोह भयो यह संकट भारो I
आनि खगेस तबै हनुमान जु,
बंधन काटि सुत्रास निवारो ॥ ६ ॥
बंधु समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो ।
देबिहिं पूजि भलि विधि सों बलि,
देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो ।
जाय सहाय भयो तब ही,
अहिरावन सैन्य समेत संहारो ॥ ७ ॥
काज किये बड़ देवन के तुम,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।
कौन सो संकट मोर गरीब को,
जो तुमसे नहिं जात है टारो ।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
जो कछु संकट होय हमारो ॥ ८ ॥
॥ दोहा ॥
लाल देह लाली लसे,
अरु धरि लाल लंगूर ।
वज्र देह दानव दलन,
जय जय जय कपि सूर ॥
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संकट मोचन हनुमानाष्टक के लाभ (Laabh)

- अचानक आने वाले संकट, दुर्घटना, बाधाएँ और भय दूर होते हैं।
- घर और परिवार में नकारात्मक शक्तियाँ टिक नहीं पातीं।
- रोग-व्याधि, मानसिक तनाव, कोर्ट केस, शत्रु बाधा समाप्त होती है।
- नौकरी, व्यापार और धन संबंधी रुकावटें दूर होती हैं।
- विद्यार्थियों में स्मरण शक्ति, एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ता है।
- साहस, ऊर्जा, पराक्रम और मनोबल अत्यधिक बढ़ जाता है।
- जीवन में सुरक्षा, स्थिरता और शुभता का वास होता है।












