
Margashirsha Lakshmi Puja 2025: मार्गशीर्ष मास, जिसे अगहन मास भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग में अत्यंत शुभ समय माना जाता है। इसी माह के गुरुवार को की जाने वाली मार्गशीर्ष लक्ष्मी पूजा विशेष रूप से देवी लक्ष्मी को समर्पित होती है।
Margashirsha Lakshmi Puja 2025: मार्गशीर्ष लक्ष्मी पूजा कैसे करें? सही विधि, मंत्र और उपवास नियम जानें
Margashirsha Lakshmi Puja 2025: यह पूजा धन, समृद्धि, सौभाग्य, घर में स्थिरता और पारिवारिक सुख प्रदान करने वाली मानी गई है। मार्गशीर्ष के गुरुवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास करना, घर में स्वच्छता रखना, लक्ष्मी-गणेश की पूजा करना और महालक्ष्मी कथा का पाठ करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
मार्गशीर्ष लक्ष्मी पूजा विधि: पूर्ण, सरल और प्रमाणिक मार्गदर्शन
Margashirsha Lakshmi Puja 2025: यहाँ मार्गशीर्ष लक्ष्मी पूजा की पूरी विधि, उपवास नियम, कथा-पाठ से लेकर शाम की महालक्ष्मी आरती तक, सब कुछ सरल और चरणबद्ध रूप में बताया गया है।
मार्गशीर्ष लक्ष्मी पूजा क्या है?
Margashirsha Lakshmi Puja 2025: मार्गशीर्ष (नवंबर–दिसंबर) वह पवित्र समय है जब भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है—“मैं महीनों में मार्गशीर्ष हूँ।”
यही कारण है कि इस मास में लक्ष्मी पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
इस पूजा में:
- देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने
- परिवार में स्थिरता और समृद्धि बढ़ाने
- कर्ज और दरिद्रता दूर करने
- वैवाहिक जीवन में सौहार्द बनाए रखने
- की कामना की जाती है।
- यह पूजा पुरुष तथा महिलाएँ दोनों कर सकते हैं। विवाहित दंपत्ति इसे साथ में करते हैं तो इसका फल और बढ़ जाता है।
मार्गशीर्ष गुरुवार क्यों होता है विशेष?
Margashirsha Lakshmi Puja 2025: शास्त्रों में वर्णन है कि: गुरुवार का स्वामी बृहस्पति और मार्गशीर्ष मास का स्वामी स्वयं विष्णु होता है। देवी लक्ष्मी विष्णुजी की अर्धांगिनी हैं। इसलिए जब गुरुवार + मार्गशीर्ष मिलता है, यह लक्ष्मी साधना का अत्यंत शक्तिशाली योग बन जाता है।
मार्गशीर्ष लक्ष्मी पूजा की पूर्ण विधि (Step-by-Step)
अब पूरा तरीका सरल क्रम में –
1. घर की साफ-सफाई (शुभारंभ का सबसे महत्वपूर्ण कदम)
Margashirsha Lakshmi Puja 2025: इस पूजा में स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण नियम माना गया है। इसलिए पूजा से एक दिन पहले और पूजा वाले दिन घर को अच्छी तरह झाड़ू-पोछा लगाएँ दरवाज़े, रसोई और पूजा स्थान साफ रखें, लक्ष्मी माता का स्थान विशेष रूप से सुंदर और पवित्र रखें, मान्यता है कि माँ लक्ष्मी वहीं निवास करती हैं जहाँ स्वच्छता और शांति हो।
2. सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प
गुरुवार की सुबह:
- स्नान करें
- पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनें
- पूजा स्थान पर दीप जलाकर व्रत का संकल्प लें
- संकल्प में माता लक्ष्मी के चरणों में प्रार्थना करते हुए कहें कि “मैं आज का व्रत मन, वचन, कर्म से शुद्ध होकर पूर्ण निष्ठा से करूँगा/करूँगी।”
3. गणेश और लक्ष्मी पूजा (सुबह की प्राथमिक पूजा)
संकल्प के बाद:
- गणेश जी की पूजा करें
- फूल, हल्दी-कुमकुम, दूर्वा, मोदक
- गणेश मंत्र: “श्री गणेशाय नमः”
- इसके बाद लक्ष्मी पूजा करें
- लक्ष्मी जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
- सफेद या पीले फूल चढ़ाएँ
- चावल, दूध, घी, मिठाई अर्पित करें
- लक्ष्मी मंत्र:
“ॐ महालक्ष्म्यै नमः”
4. उपवास कैसे रखें? (सूर्योदय से सूर्यास्त तक)
यह व्रत सूर्योदय से सूर्यास्त तक रखा जाता है।
इस दौरान क्या खा सकते हैं?
- फल
- केला
- दूध
- चौराई/साबूदाना/सामक जैसी व्रत सामग्री
- यह उपवास शरीर को शुद्ध करता है और मन को लक्ष्य पर केंद्रित रखता है।
5. सात विवाहित और सात कन्याओं का सम्मान (पहले दिन का नियम)
मार्गशीर्ष लक्ष्मी पूजा करने वाले भक्त पहले गुरुवार को यह विशेष नियम निभाते हैं:
- 7 विवाहित महिलाओं (सौभाग्यवती) को बुलाएँ
- 7 छोटी कन्याओं का आदर करें
उन्हें दिया जाता है:
- फल
- हल्दी-कुमकुम
- एक छोटी सी वस्तु जैसे नारियल या मिठाई
- महालक्ष्मी व्रत कथा की पुस्तक
- यह नियम घर में समृद्धि और सौभाग्य के द्वार खोलता है।
- शाम की मुख्य पूजा: महालक्ष्मी आराधना
- पूरे दिन उपवास रखने के बाद शाम को मुख्य पूजा की जाती है।
6. महालक्ष्मी पूजा विधि (Evening Rituals)
शाम के समय सूर्यास्त के बाद –
- पीले वस्त्र पहनें
- पूजा स्थल पर दीपक और धूप जलाएँ
- देवी के समक्ष जल, चंदन, कुंकुम, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करें
7. महालक्ष्मी व्रत कथा का पाठ
इस दिन महालक्ष्मी व्रत कथा और महालक्ष्मी महात्म्य पढ़ना अनिवार्य कहा गया है।
कथा सुनने या पढ़ने से:
- व्रत का फल पूर्ण होता है
- घर में सुख-समृद्धि आती है
- मां लक्ष्मी की कृपा स्थिर होती है
- 8. लक्ष्मी आरती (पूजा का अंतिम चरण)
यहाँ पढ़ें महालक्ष्मी व्रत कथा 👇
मार्गशीर्ष गुरुवार महालक्ष्मी व्रत कथा व पूजा विधि, आरती सहित
अंत में:
- महालक्ष्मी जी की आरती करें
- कर्पूर या घी के दीप से आरती करना सर्वोत्तम माना गया है
- आरती करते हुए श्रद्धा से कहना चाहिए
“जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।”
यहाँ पढ़ें महालक्ष्मी आरती 👇
श्री महालक्ष्मी देवीची आरती एवं ॐ जय लक्ष्मी माता आरती
9. प्रसाद और व्रत का पारण
पूजा के बाद:
- देवी को भोग लगाएँ
- फिर व्रतधारी स्वयं सात्त्विक शाकाहारी भोजन ग्रहण करें
- यह भोजन वही होना चाहिए जो प्रसाद के रूप में चढ़ाया गया हो
- इससे व्रत का समापन पूर्ण माना जाता है।
मार्गशीर्ष लक्ष्मी पूजा करते समय विशेष सावधानियाँ

✔ सदा सकारात्मक वातावरण रखें
✔ घर में कलह न करें
✔ सफाई किसी भी हालत में न छोड़ें
✔ काले या गहरे नकारात्मक रंग न पहनें
✔ पूजा के दौरान मन भटकने न दें
✔ भोजन में प्याज-लहसुन का उपयोग न करें
मार्गशीर्ष लक्ष्मी पूजा का महत्व और लाभ
इस पूजा से भक्तों को अनेक आध्यात्मिक और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं—
- धन का आगमन बढ़ता है
- घर में बरकत बनी रहती है
- विवाह में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है
- कर्ज से मुक्ति के योग बनते हैं
- व्यापार और नौकरी में उन्नति होती है
- मानसिक शांति और सुख मिलता है
- मार्गशीर्ष के प्रत्येक गुरुवार को लगातार 4 बार यह पूजा करने से माता लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं।
Margashirsha Lakshmi Puja 2025: मार्गशीर्ष लक्ष्मी पूजा एक ऐसी साधना है जो मन को पवित्र करती है, घर को सकारात्मक ऊर्जा से भरती है और माता लक्ष्मी की दिव्य कृपा को आकर्षित करती है।
यह पूजा कठिन नहीं, बल्कि सरल, पवित्र और अत्यंत फलदायी है।
यदि पूर्ण श्रद्धा, स्वच्छता और नियमों के साथ यह व्रत किया जाए तो जीवन में धन-धान्य और सौभाग्य की वर्षा होना निश्चित है।












