
Mokshada Ekadashi Vrat Katha: शास्त्रों में कहा गया है कि यह एकादशी पापों को नष्ट करने और साधक को मोक्ष (जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति) दिलाने वाली है। इसका व्रत करने से पूर्वजों और पितरों की आत्मा को भी शांति मिलती है।
मोक्षदा एकादशी व्रत कथा पूजा विधि व आरती | Mokshada Ekadashi Vrat Katha – मार्गशीर्ष एकादशी व्रत कथा
Mokshada Ekadashi Vrat Katha: भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया कि मार्गशीर्ष मास की यह एकादशी सभी एकादशियों में अत्यंत पवित्र और फलदायी है। इसका पुण्य सभी दान, यज्ञ और तप से ज्यादा माना गया है।
✅ मोक्षदा एकादशी व्रत का महत्व (Detailed Mahatva)
Mokshada Ekadashi Vrat Katha: अनजाने में हुए पाप, संताप, मानसिक दोष, जीवन की रुकावटें और नकारात्मक कर्म – मोक्षदा एकादशी का उपवास इन सबका क्षय करता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
Mokshada Ekadashi Vrat Katha: इस दिन किया गया व्रत और दान पितृदोष को शांत करता है और पितरों को उज्ज्वल गति प्रदान करता है। जो व्यक्ति अपने पितरों की शांति के लिए चिंतित हों, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना गया है। चारों पुरुषार्थों की कृपा प्राप्त होती है।, धन, सुख और वैभव का आगमन और संतान की सफलता, विवाह, करियर और उन्नति में आ रही रुकावटें इस एकादशी व्रत से दूर होती हैं, ऐसा पुराणों में उल्लेख मिलता है।
मोक्षदा एकादशी व्रत कथा
युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से निवेदन किया कि वे 26 एकादशियों के नाम, उनकी व्रत-विधि और किस देवता का पूजन करना चाहिए—यह सब विस्तार से बताएं। इस पर भगवान श्रीकृष्ण बोले कि मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ‘मोक्षदा’ कहा जाता है और जैसा इसका नाम है, वैसा ही इसका प्रभाव भी—यह व्रत मोक्ष देने वाला है।
बारह महीनों में मार्गशीर्ष को वे सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। गीता में भी उन्होंने अर्जुन से कहा है कि कृष्ण पक्ष की एकादशी प्रेम देती है और शुक्ल पक्ष की एकादशी मोक्ष प्रदान करती है। इस व्रत में दामोदर भगवान की पूजा करनी चाहिए और व्रतधारी को भगवान की उखान-बन्ध लीला का श्रवण अवश्य करना चाहिए।
अब मोक्षदा एकादशी की पौराणिक कथा सुनो—प्राचीन गोकुल में वैखानस नाम का राजा रहता था जो धर्मात्मा और भक्त था। उसने स्वप्न में अपने पिता को नरक में कष्ट भोगते देखा। सुबह होते ही वह ज्योतिषियों और वेदपाठी ब्राह्मणों से उपाय पूछने लगा। उन्होंने बताया कि समीप ही पर्वत ऋषि का आश्रम है और उनकी शरण लेने से उसके पिता का उद्धार निश्चित है।
राजा तुरंत पर्वत मुनि के पास पहुँचा और चरणों में गिरकर बोला कि उसने स्वप्न में अपने पिता को यमदूतों से दण्डित होते देखा है, कृपया बताएं कि उनकी मुक्ति कैसे होगी। पर्वत मुनि ने ध्यान कर कहा कि सामान्य धर्म-कर्म देर से फल देते हैं और यद्यपि भगवान शंकर शीघ्र वरदाता हैं, पर उन्हें प्रसन्न करने में भी समय लगता है।
इस बीच उसके पिता और कष्ट सहेंगे। इसलिए सबसे सरल और तुरंत फल देने वाला उपाय मोक्षदा एकादशी का व्रत है। परिवार सहित विधि-विधान से यह व्रत करके इसका पुण्य-फल पिता को अर्पित कर दो—उनकी मुक्ति अवश्य होगी। राजा ने पर्वत मुनि के निर्देशानुसार पूरे परिवार के साथ मोक्षदा एकादशी का व्रत किया और व्रत का फल अपने पिता को समर्पित कर दिया।
व्रत के प्रभाव से राजा का पिता नरक से मुक्त होकर स्वर्ग को चला गया। अंत में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि जो व्यक्ति श्रद्धा से मोक्षदा एकादशी की कथा सुनता है, उसे वाजपेय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।
✅ मोक्षदा एकादशी के विशेष नियम (Vishesh Niyam)
- एकादशी के दिन अनाज, दाल, चावल, लहसुन-प्याज का सेवन वर्जित है।
- किसी भी प्रकार का नकारात्मक विचार, क्रोध, झूठ, छल न करें।
- पूरे दिन सात्त्विक आचरण, मन और वाणी की पवित्रता रखें।
- भगवान विष्णु के चरणों में पीले फूल, तुलसी और पीला प्रसाद चढ़ाएँ।
- एकादशी के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन आवश्यक माना गया है।
✅ मोक्षदा एकादशी व्रत – पूजा विधि (Puja Vidhi)
- प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु का पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन करें – गंध, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पीली कमल पर आराधना करें।
- विष्णु सहस्रनाम, गीता, या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें।
- मोक्षदा एकादशी व्रत कथा श्रद्धा से पढ़ें/सुने।
- दिन भर व्रत रखें – जल, फल या निर्जला जैसा संकल्प हो।
- रात में जागरण करें और विष्णु भजन करें।
- द्वादशी तिथि पर गरीब, ब्राह्मण या गाय को दान देकर व्रत का पारण करें।
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