Racha Hai Shrshti Ko Jis Prbhu Ne Lyrics: रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने” एक अत्यंत प्रसिद्ध और लोकप्रिय भजन है, जिसे भक्तिपूर्ण भावना से गाया जाता है। इस भजन के गीतकार पूज्य श्री देवेंद्र जी महाराज हैं।
भजन का संदेश यह है कि इस सृष्टि का निर्माण और संचालन केवल ईश्वर की इच्छा और शक्ति से ही होता है। जो कुछ भी इस संसार में घटता है या घटने वाला है, वह सब ईश्वर की मर्जी और नियंत्रण के अनुसार ही होता है। यह भजन हमें ईश्वर के परम नियंत्रण, उनकी अनंत शक्ति और सृष्टि में उनकी उपस्थिति को याद दिलाता है।
भक्तजन इसे सुनकर ईश्वर के प्रति श्रद्धा, भक्ति और विश्वास में गहरा अनुभव करते हैं।
रचा है श्रष्टि को जिस प्रभु ने | Racha Hai Shrshti Ko Jis Prbhu Ne Lyrics in Hindi
Racha Hai Shrshti Ko Jis Prbhu Ne Lyrics:
रचा है श्रष्टि को जिस प्रभु ने,
रचा है श्रष्टि को जिस प्रभु ने,
वही ये श्रष्टि चला रहे है,
जो पेड़ हमने लगाया पहले,
उसी का फल हम अब पा रहे है,
रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने,
वही ये श्रष्टि चला रहे है।।
इसी धरा से शरीर पाए,
इसी धरा में फिर सब समाए,
है सत्य नियम यही धरा का,
है सत्य नियम यही धरा का,
एक आ रहे है एक जा रहे है,
रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने,
वही ये श्रष्टि चला रहे है।।
जिन्होने भेजा जगत में जाना,
तय कर दिया लौट के फिर से आना,
जो भेजने वाले है यहाँ पे,
जो भेजने वाले है यहाँ पे,
वही तो वापस बुला रहे है,
रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने,
वही ये श्रष्टि चला रहे है।।
बैठे है जो धान की बालियो में,
समाए मेहंदी की लालियो में,
हर डाल हर पत्ते में समाकर,
हर डाल हर पत्ते में समाकर,
गुल रंग बिरंगे खिला रहे है,
रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने,
वही ये श्रष्टि चला रहे है।।
रचा है श्रष्टि को जिस प्रभु ने,
वही ये श्रष्टि चला रहे है,
जो पेड़ हमने लगाया पहले,
उसी का फल हम अब पा रहे है,
रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने,
वही ये श्रष्टि चला रहे है।।
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