सुखकर्ता दुखहर्ता आरती – महत्व
सुख और समृद्धि का कारक: इस आरती का पाठ करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति आती है। संकट और विघ्न निवारण: भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है। इस आरती से सभी बाधाएँ और कठिनाइयाँ दूर होती हैं। भक्ति और मनोकामना पूर्णता: भक्तों की इच्छाएँ और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
विशेष अवसरों पर अनुष्ठान: गणेश चतुर्थी, शादी, गृह प्रवेश, व्यवसाय प्रारंभ आदि शुभ अवसरों पर इस आरती का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है।
Sukhkarta Dukhharta Varta Aarti: सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची आरती पाठ, शेंदुर लाल चढायो आरती
आरती – सुखकर्ता दुखहर्ता
सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची,
नुरवी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची।
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची,
कंठी झळके माळ मुक्ताफळाची।।
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती,
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती।
जय देव जय देव ||
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा,
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा।
हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा,
रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया।।
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति,
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति।
जय देव जय देव।
लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना,
सरळ सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना।
दास रामाचा वाट पाहे सदना,
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना।।
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति,
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति।
जय देव जय देव।
आरती – शेंदुर लाल चढायो

शेंदुर लाल चढायो आरती:
शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुखको।
दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरीहरको॥
हाथ लिये गुडलड्डू साई सुरवरको।
महिमा कहे न जाय लागत हूँ पदको॥
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता।
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता॥
अष्टी सिद्धी दासी संकटको बैरी।
विघ्नविनाशन मंगलमूरत अधिकाई॥
कोटीसुरजप्रकाश ऐसी छबि तेरी।
गंडस्थलमदमस्तक झुले शशिबहारी॥
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता।
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता॥
भावभगतिसे कोई शारणागत आवे।
संतति संपति सबही भरपूर पावे।
ऐसे तुम महाराज मोको अति भवे
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे॥
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता।
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता॥
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