खाटू श्याम जी की आरती महत्व
खाटू श्याम जी की आरती पढ़ने और सुनने से भक्तों के सभी दुख और संताप दूर हो जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खाटू के श्याम बाबा हारे और पीड़ितों के सहारे हैं। इसलिए जो भी व्यक्ति नियमित रूप से खाटू श्याम जी की आरती करता है, श्याम बाबा उनके सभी कष्ट हर देते हैं।
आइए, अब हम पढ़ते हैं खाटू श्याम बाबा की आरती के लिरिक्स।
Khatu Shyam Ji Ki Aarti: खाटू श्याम जी की आरती पाठ
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।
रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे ।
तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।
गल पुष्पों की माला, सिर पार मुकुट धरे ।
खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।
मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे ।
सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।
झांझ कटोरा और घडियावल, शंख मृदंग घुरे ।
भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।
जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे ।
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।
श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे ।
कहत भक्त-जन, मनवांछित फल पावे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।
जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे ।
निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे ।
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खाटू श्याम जी की आरती – भावार्थ

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥
भावार्थ:
हे श्याम बाबा! जय हो आपको। आप खाटू धाम में विराजमान हैं और आपका रूप अनुपम और दिव्य है।
रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे।
तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े॥
भावार्थ:
आप रत्नों से सजा सिंहासन पर बैठे हैं, सिर पर चंवर है। आपके शरीर पर केसरिया वस्त्र हैं और कानों में सुंदर कुंडल हैं।
गल पुष्पों की माला, सिर पार मुकुट धरे।
खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले॥
भावार्थ:
आपके गले में फूलों की माला है और सिर पर मुकुट है। पूजा में धूप, अग्नि और दीपक जलाए जाते हैं।
मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे।
सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे॥
भावार्थ:
भोग में मोदक, खीर, चूरमा और सोने के थाल रखे जाते हैं। आपके सेवक नित्य सेवा में लगे रहते हैं।
झांझ कटोरा और घडियावल, शंख मृदंग घुरे।
भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे॥
भावार्थ:
आरती में झांझ, कटोरा, घड़ियाल, शंख और मृदंग बजाए जाते हैं। भक्त आरती गाकर जय-जयकार करते हैं।
जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे।
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे॥
भावार्थ:
जो भक्त श्याम बाबा का ध्यान करता है, वह फल प्राप्त करता है और सभी दुखों से मुक्त होता है। भक्त अपने मुख से “श्री श्याम-श्याम” का उच्चारण करता है।
श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत भक्त-जन, मनवांछित फल पावे॥
भावार्थ:
जो भी भक्त श्याम बिहारी जी की आरती गाता है, अन्य भक्त कहते हैं कि वह अपने मनवांछित फल प्राप्त करता है।
जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे।
निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे॥
भावार्थ:
हे श्याम बाबा! जय हो आपको। आप अपने भक्तों के सभी कार्य पूरे करते हैं और उन्हें खुशियाँ देते हैं।
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥
भावार्थ:
हे श्याम बाबा! आप खाटू धाम में विराजमान हैं और आपका रूप अद्वितीय एवं दिव्य है।












