गणपति बप्पा की कृपा से मनोबल बढ़ता है, जीवन में शांति और समृद्धि आती है, और सभी कार्य सिद्ध होते हैं।
श्री गणेश आरती के बारे में (महत्व):
भगवान गणेश सभी देवों में प्रथम पूज्य हैं। बप्पा की पूजा करने से व्यक्ति को यश, वैभव और ज्ञान की प्राप्ति होती है। हिंदू धर्म में किसी भी अन्य देवता की पूजा के बाद आरती की जाती है। मान्यता है कि श्री गणेश जी की आरती से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों को अपनी मनोकामनाएँ पूरी करने का आशीर्वाद देते हैं।
यहां हम श्री गणेश की तीन प्रमुख आरतियों का संकलन प्रस्तुत कर रहे हैं – जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा, सुखकर्ता दुखहर्ता, और सेंदुर लाल चढ़ायो। इन आरतियों को आप किसी भी अनुष्ठान या पूजा में श्री गणेश की आरती के समय पढ़ सकते हैं।
Shri Ganesh Ji ki Aarti: श्री गणेश आरती पाठ – जय गणेश जय गणेश देवा आरती
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
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जय गणेश जय गणेश आरती अर्थ

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
भावार्थ:
हे गणेश देव! जय हो आपको। आप माता पार्वती और पिता महादेव के पुत्र हैं।
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
भावार्थ:
आप एक दांत वाले, दयालु हैं और आपके चार भुजाएँ हैं। आपके माथे पर सिंदूर सजता है और आप मूषक (चूहा) पर सवार रहते हैं।
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
भावार्थ:
भक्त आपको पान, फूल और मेवा चढ़ाते हैं। लड्डुओं का भोग लगाकर संत आपकी सेवा करते हैं।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
भावार्थ:
आप अंधों को दृष्टि देते हैं, रोगियों को स्वास्थ्य प्रदान करते हैं, बिना संतान वालों को संतान देते हैं और गरीबों को समृद्धि प्रदान करते हैं।
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
भावार्थ:
जो भी भक्त आपका शरण लेता है, उसकी सेवा सफल करें।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
भावार्थ:
आप गरीब और दीनों की रक्षा करें। आप शंभु (शिव) के पुत्र हैं और भक्तों की सभी इच्छाएँ पूरी करें। मैं आपका भक्ति में बलिदान करता हूँ।












