Shree Kaal Bhairava Aarti Lyrics in Hindi: “जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा, जय काली और गौर देवी कृत सेवा।”
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति पर राहु या शनि से संबंधित दोष हो, तो उन्हें भगवान काल भैरव की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
Kaal Bhairav Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: श्री काल भैरव जी की आरती
Kaal Bhairava Aarti Lyrics: भैरव बाबा की उपासना से ग्रहों का प्रकोप शांत होता है और जीवन में सुरक्षा, शक्ति व स्थिरता बढ़ती है। पूजा करने के बाद काल भैरव आरती अवश्य करनी चाहिए, क्योंकि आरती के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए अब पढ़ते हैं भगवान काल भैरव की पवित्र आरती –
Kaal Bhairava Aarti Lyrics:
जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा।
जय काली और गौर देवी कृत सेवा।।
प्रभु जय भैरव देवा।।
तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिंधु तारक।
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक।।
जय भैरव देवा…वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी।
महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी।।
जय भैरव देवा।।
तुम बिन देवा, सेवा सफल नहीं होवे।
चौमुख दीपक दर्शन से सब दुःख खोवे ॥
जय भैरव देवा।।
तेल चटकी दधि मिश्रित भाषावाली तेरी।
कृपा कीजिये भैरवजी, करिए नहीं देरी।।
जय भैरव देवा।।
पांव घुंघरू बाजत अरु डमरू दमकावत।
बटुकनाथ बन बालक जल मन हरषावत।
जय भैरव देवा।।
कालभैरवजी की आरती जो कोई जन गावे।
कहे धरनी धर मानुष मनवांछित फल पावे।।
जय भैरव देवा।।
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Kaal Bhairav Ji Ki Aarti : श्री काल भैरव जी की आरती अर्थ सहित

जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा। जय काली और गौर देवी कृत सेवा।।
हे भैरव देव! आपकी जय हो—आप वही दैवी शक्ति हैं जो काली और गौर देवी की सेवा व संरक्षण करते हैं।
तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिंधु तारक। भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक।।
आप ही पापों का नाश करने वाले, दुखों के समुद्र से उबारने वाले और भक्तों को सुख देने वाले हैं। आपका भीषण रूप दुष्टों के लिए भयकारी है।
वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी। महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी।।
आपका वाहन श्वान (काला कुत्ता) है और आपके हाथ में त्रिशूल शोभा देता है। आपकी महिमा अनंत है और आप भय दूर करने वाले देव हैं।
तुम बिन देवा, सेवा सफल नहीं होवे। चौमुख दीपक दर्शन से सब दुःख खोवे ॥
आपकी कृपा के बिना कोई पूजा पूर्ण नहीं होती। चौमुख दीपक से आपकी आरती करने पर सभी दुख दूर होने लगते हैं।
तेल चटकी दधि मिश्रित भाषावाली तेरी। कृपा कीजिये भैरवजी, करिए नहीं देरी।।
आपको तेल और दही मिश्रित भोग प्रिय है। हे भैरव जी! कृपा कीजिए और अपने भक्तों पर देर न करें।
पांव घुंघरू बाजत अरु डमरू दमकावत। बटुकनाथ बन बालक जल मन हरषावत।
आपके चरणों में बंधे घुंघरू और डमरू की धुन भक्तों के मन को प्रसन्न करती है। कभी आप बटुकनाथ (बालक) रूप में प्रकट होकर भक्तों का मन हर्ष से भर देते हैं।
कालभैरवजी की आरती जो कोई जन गावे। कहे धरनी धर मानुष मनवांछित फल पावे।।
जो भी भक्त श्रद्धा से यह आरती गाता है, वह मनुष्य जन्म पाकर अपनी मनोकामनाएँ पूरी करता है।












